भोपाल: दतिया विधानसभा उपचुनाव में टिकट वितरण को लेकर भड़की असंतोष की चिंगारी अब एक बड़े सियासी और कानूनी टकराव में बदल गई है। बीजेपी द्वारा पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी बनाए जाने के विरोध में शुरू हुआ प्रदर्शन शनिवार (11 जुलाई 2026) को हिंसक हो गया। शुक्रवार शाम से शुरू हुए इस विरोध प्रदर्शन के दौरान डॉ. मिश्रा के करीब 5000 समर्थकों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (NH-44) पर 11 घंटे से अधिक समय तक चक्काजाम रखा, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
एसपी-कलेक्टर पर पथराव, पुलिस बल ने दागे आंसू गैस के गोले
प्रदर्शनकारियों को हटाने पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम के साथ तीखा टकराव होने से हालात बिगड़ गए। पुलिस का आरोप है कि उपद्रवियों ने एसपी और कलेक्टर सहित पुलिस बल पर जमकर पथराव किया, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। इस हिंसा में एसपी मयूर खंडेलवाल, एसडीओपी पूनमचंद यादव और इंदरगढ़ टीआई नरेंद्र सिंह राजपूत सहित 8 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने भी स्वयं पर पथराव होने की पुष्टि की है। वहीं, दूसरी ओर बीजेपी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पहले पुलिस की ओर से पथराव किया गया और उनके वाहनों में तोड़फोड़ की गई।
27 नामजद नेताओं पर FIR, कई आरोपी गिरफ्तार व नजरबंद
कलेक्टरगंज और दतिया पुलिस ने उपद्रव को लेकर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत 27 नामजद नेताओं और 200 अज्ञात कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की है। नामजद आरोपियों में जिला महामंत्री भूरे चौधरी, पार्षद अक्कू दुबे, बृजेश दुबे, अनूप यादव, जिला मंत्री भानु ठाकुर, व्यापार प्रकोष्ठ अध्यक्ष राजू गुगोरिया, जनपद उपाध्यक्ष प्रशांत डांगी, जनपद सदस्य लला रजक, भाजयुमो जिलाध्यक्ष मान सिंह कुशवाहा, विजय झंडा गुरु, भाजयुमो नेता आकाश भार्गव, लवकुश गुर्जर और किसान नेता सुनील दुबे शामिल हैं। पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि कुछ को नजरबंद किया गया है। कार्यकर्ताओं का दावा है कि इस झड़प में भूरे चौधरी, किसान मोर्चा उपाध्यक्ष सुमित यादव और राजीव सेन सहित कुछ महिला कार्यकर्ता भी घायल हुई हैं।
उपचुनाव से पहले बीजेपी में अंदरूनी कलह बरकरार
इस भीषण बवाल के बाद बीजेपी संगठन ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा को साथ लेकर आगे बढ़ने के संकेत देकर स्थिति सामान्य करने की कोशिश की है, लेकिन जमीनी स्तर पर नाराजगी बरकरार है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कुछ पदाधिकारी इस विवाद का शीघ्र समाधान चाहते हैं, जबकि बड़ी संख्या में कार्यकर्ता टिकट वितरण में हुई उपेक्षा को लेकर अब भी असंतुष्ट हैं। ऐसे में दतिया उपचुनाव से ठीक पहले बीजेपी के भीतर का यह घमासान पूरी तरह थमता नजर नहीं आ रहा है।