Agra News : आगरा के रेलवे स्टेशन पर एक महिला यात्री को ट्रेन छूटने से बचाने की कोशिश उस समय विवाद में बदल गई, जब रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और रेलवे के डिप्टी स्टेशन अधीक्षक के बीच कहासुनी हाथापाई तक पहुंच गई. घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है.
जानकारी के मुताबिक, एक ट्रेन आगरा स्टेशन पर रुकी थी. इसी दौरान एक महिला यात्री सामान खरीदने के लिए प्लेटफॉर्म पर उतर गई. तभी ट्रेन चलने लगी. यह देखकर डिप्टी स्टेशन अधीक्षक नरेंद्र चाहर ने तत्काल वॉकी-टॉकी के जरिए संबंधित कर्मचारियों को सूचना देकर ट्रेन रुकवाने की व्यवस्था की, ताकि महिला सुरक्षित तरीके से दोबारा ट्रेन में सवार हो सके.
बताया जा रहा है कि इसी बीच RPF के जवानों ने महिला को चेन पुलिंग के आरोप में रोक लिया. डिप्टी SS नरेंद्र चाहर ने इसका विरोध करते हुए कहा कि महिला की स्थिति को देखते हुए कार्रवाई उचित नहीं है. इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया.
आरोप है कि बहस के दौरान RPF कर्मियों ने डिप्टी SS नरेंद्र चाहर के साथ अभद्रता की और उन्हें पकड़कर घसीटते हुए ले गए.
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद रेलवे प्रशासन ने पूरे मामले का संज्ञान लिया. प्रारंभिक जांच के बाद RPF के चार पुलिसकर्मियों मेघराज, बालकिशन मीणा, बदन सिंह और जितेंद्र को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.
अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई की जाएगी. घटना ने रेलवे सुरक्षा बल और रेलवे संचालन से जुड़े अधिकारियों के बीच समन्वय, यात्रियों के साथ व्यवहार और ड्यूटी के दौरान अनुशासन जैसे मुद्दों पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
बेंगलुरु : कर्नाटक के परिवहन मंत्री बायराथी सुरेश ने बेंगलुरु में सरकारी बस सेवाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए शनिवार रात आम यात्री का भेष धारण कर औचक निरीक्षण किया. चेहरे पर मास्क लगाकर उन्होंने बिना किसी सरकारी काफिले या पहचान के बीएमटीसी बस में सफर किया. निरीक्षण के दौरान उन्हें वही परेशानियां झेलनी पड़ीं, जिनका सामना रोजाना आम यात्री करते हैं.
हेब्बल से नागशेट्टीहल्ली रूट की एक बस में सवार होने के बाद मंत्री ने टिकट लेने के लिए कंडक्टर को 100 रुपये का नोट दिया. कंडक्टर ने उनसे खुले पैसे मांगे. जब मंत्री ने कहा कि उनके पास छुट्टे नहीं हैं, तो कंडक्टर ने साफ शब्दों में कहा कि यदि खुल्ले पैसे नहीं हैं तो बस से नीचे उतर जाइए. मंत्री ने अपनी पहचान उजागर नहीं की और बिना किसी बहस के चुपचाप बस से उतर गए.
इसके बाद बायराथी सुरेश ने करीब दो घंटे तक बेंगलुरु के विभिन्न इलाकों में 10 से अधिक BMTC बसों का निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने बसों के संचालन, यात्रियों की सुविधाओं और कर्मचारियों के व्यवहार का जायजा लिया. निरीक्षण में कई खामियां सामने आईं. एक मामले में बस चालक और कंडक्टर पर निर्धारित बस स्टॉप पर यात्री के संकेत के बावजूद बस नहीं रोकने का आरोप मिला, जिसके बाद मंत्री ने दोनों को निलंबित करने के निर्देश दिए.
निरीक्षण के दौरान मंत्री ने ऑटो रिक्शा से भी सफर किया, जहां मीटर से अधिक किराया वसूलने की शिकायत भी सामने आई. बाद में उन्होंने कहा कि इस औचक निरीक्षण का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की वास्तविक स्थिति समझना, कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना और यात्रियों को बेहतर एवं भरोसेमंद सेवा उपलब्ध कराना है.
बेंगलुरु : कर्नाटक के परिवहन मंत्री बायराथी सुरेश ने बेंगलुरु में सरकारी बस सेवाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए शनिवार रात आम यात्री का भेष धारण कर औचक निरीक्षण किया. चेहरे पर मास्क लगाकर उन्होंने बिना किसी सरकारी काफिले या पहचान के बीएमटीसी बस में सफर किया. निरीक्षण के दौरान उन्हें वही परेशानियां झेलनी पड़ीं, जिनका सामना रोजाना आम यात्री करते हैं.
हेब्बल से नागशेट्टीहल्ली रूट की एक बस में सवार होने के बाद मंत्री ने टिकट लेने के लिए कंडक्टर को 100 रुपये का नोट दिया. कंडक्टर ने उनसे खुले पैसे मांगे. जब मंत्री ने कहा कि उनके पास छुट्टे नहीं हैं, तो कंडक्टर ने साफ शब्दों में कहा कि यदि खुल्ले पैसे नहीं हैं तो बस से नीचे उतर जाइए. मंत्री ने अपनी पहचान उजागर नहीं की और बिना किसी बहस के चुपचाप बस से उतर गए.
इसके बाद बायराथी सुरेश ने करीब दो घंटे तक बेंगलुरु के विभिन्न इलाकों में 10 से अधिक BMTC बसों का निरीक्षण किया. इस दौरान उन्होंने बसों के संचालन, यात्रियों की सुविधाओं और कर्मचारियों के व्यवहार का जायजा लिया. निरीक्षण में कई खामियां सामने आईं. एक मामले में बस चालक और कंडक्टर पर निर्धारित बस स्टॉप पर यात्री के संकेत के बावजूद बस नहीं रोकने का आरोप मिला, जिसके बाद मंत्री ने दोनों को निलंबित करने के निर्देश दिए.
निरीक्षण के दौरान मंत्री ने ऑटो रिक्शा से भी सफर किया, जहां मीटर से अधिक किराया वसूलने की शिकायत भी सामने आई. बाद में उन्होंने कहा कि इस औचक निरीक्षण का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की वास्तविक स्थिति समझना, कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना और यात्रियों को बेहतर एवं भरोसेमंद सेवा उपलब्ध कराना है.