Gyanvapi Case New Supreme Court: वर्षों से कानूनी गलियारों में चर्चा का केंद्र रहे वाराणसी के ऐतिहासिक ज्ञानवापी मामले में देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा निर्देश दिया है। राम मंदिर विवाद के समाधान के बाद से ही यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। साल 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत (सेशन कोर्ट) के उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसके तहत 'व्यास जी के तहखाने' में हिंदू पक्ष को पूजा करने की अनुमति दी गई थी। अब करीब दो साल से अधिक का समय बीतने के बाद, उच्चतम न्यायालय ने इस पूरे विवाद पर सीधा फैसला देने के बजाय एक नया और सकारात्मक रास्ता चुना है। अदालत ने दोनों पक्षों को आपसी बातचीत और मध्यस्थता (Mediation) के जरिए इस संवेदनशील मुद्दे को हमेशा के लिए सुलझाने का निर्देश दिया है।
14 जुलाई को आमने-सामने बैठेंगे दोनों पक्ष, सभी को नोटिस जारी
सुप्रीम कोर्ट के इस अहम आदेश के बाद मामले से जुड़े सभी संबंधित पक्षों को आधिकारिक नोटिस भेज दिए गए हैं। हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि आगामी 14 जुलाई को इस सिलसिले में हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों के प्रतिनिधि एक साझा बैठक करेंगे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य मध्यस्थता के जरिए दोनों समुदायों के बीच एक सर्वमान्य सुलह-समझौता तैयार करना है। विधिक जानकारों का मानना है कि यदि यह आपसी वार्ता सफल हो जाती है, तो ज्ञानवापी परिसर से जुड़े तमाम अन्य मुकदमों का भी स्वतः ही स्थाई निस्तारण हो जाएगा।
इन दो मुख्य मुकदमों पर केंद्रित रहेगी मध्यस्थता की बातचीत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस मध्यस्थता प्रक्रिया के दौरान मुख्य रूप से दो बड़े मुकदमों पर गहन चर्चा होने की संभावना है। इनमें पहला मामला 'राखी सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार' और दूसरा 'शैलेंद्र सिंह व्यास बनाम अंजुमन इंतजामिया कमेटी' से संबंधित है। अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी ने मीडिया को स्पष्ट किया कि न्यायपालिका में मध्यस्थता के माध्यम से कई जटिल विवादों का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जाता है। इस प्रक्रिया के तहत पक्ष और विपक्ष के सभी वादियों को एक मेज पर आमंत्रित किया जाता है और उनके बीच आपसी सहमति बनाने का गंभीर प्रयास किया जाता है। ज्ञानवापी मामले में भी इसी तर्ज पर सौहार्दपूर्ण हल निकालने की कोशिश की जा रही है।
एएसआई सर्वे की रिपोर्ट और हिंदू पक्ष का बड़ा प्रस्ताव
मीडिया से मुखातिब होते हुए सुधीर त्रिपाठी ने यह भी याद दिलाया कि अदालत के पिछले आदेशों के अनुपालन में ज्ञानवापी परिसर के भीतर एडवोकेट कमीशन की कार्रवाई और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) का वैज्ञानिक सर्वे संपन्न हो चुका है। इस जांच के दौरान परिसर की दीवारों और खंभों पर सनातन धर्म से जुड़े कई प्राचीन धार्मिक चिन्ह जैसे कि स्वास्तिक, ओ३म् और त्रिशूल के निशान पाए गए थे। इसके साथ ही एएसआई ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में इस ढांचे को एक प्राचीन मंदिर का अवशेष बताया था। पूर्व में हुई कमीशन की कार्रवाई के दौरान वजूखाने में एक कथित शिवलिंग की आकृति भी प्रकाश में आई थी।
इस बीच, हिंदू पक्ष ने एक बेहद उदार और बड़ा प्रस्ताव सामने रखा है। उनके वकील ने स्पष्ट किया कि यदि इस चल रही मध्यस्थता की कार्रवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष स्वेच्छा से ज्ञानवापी परिसर को हिंदुओं को सौंपने के लिए तैयार हो जाता है, तो हिंदू पक्ष अदालत के समक्ष किसी भी प्रकार के हर्जाने या मुआवजे की मांग नहीं करेगा।
तहखाने में सुचारू रूप से चल रहा है धार्मिक अनुष्ठान
उल्लेखनीय है कि अदालत द्वारा पूर्व में दिए गए आदेश के बाद से ही ज्ञानवापी के विवादित तहखाने में हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार नियमित पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान अनवरत जारी हैं। प्रशासनिक देखरेख में कराए गए सर्वे के दौरान तहखाने के भीतर से जो प्राचीन देवी-देवताओं की प्रतिमाएं बरामद हुई थीं, उन्हें वहां पूरी मर्यादा के साथ स्थापित किया गया है, जहां प्रतिदिन श्रद्धालु दर्शन और पूजन कर रहे हैं।