संसद में गूंजेगे राम मंदिर चंदा चोरी, धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा और ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल समेत ये 7 मुद्दे

Abhishek Chaturvedi 12 Jul 2026 08:19: PM 3 Mins
संसद में गूंजेगे राम मंदिर चंदा चोरी, धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा और ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल समेत ये 7 मुद्दे

20 जुलाई से संसद का मानसूत्र सत्र हो रहा है, जहां विपक्ष के पास मुद्दों की भरमार है, तो वहीं बीजेपी के पास बिल पास कराने की चुनौती है, 2014 के बाद से शायद ये पहला सत्र ऐसा होने वाला है, जहां मोदी के सामने 7 चुनौतियां एक साथ खड़ी हैं, वो विदेश से लौटते ही बड़ी मीटिंग बुला सकते हैं, जहां अयोध्या से लेकर अंडमान तक और जंतर-मंतर से लेकर कश्मीर तक में चल रहे मुद्दे तक पर नेताओं से बचाव की रणनीति मांग सकते हैं...कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से लेकर पर्यावरण विरोधी प्रोजेक्ट को बढ़ावा देने के जो आरोप सरकार पर लग रहे हैं, उस पर खूब नारेबाजी हो सकती है, जो संसद के सुचारू रूप से चलने में न सिर्फ समस्या पैदा करेगा, बल्कि इसे बार-बार स्थगित भी करना पड़ सकता है. जो मोदी सरकार के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं होगा, क्योंकि इस सत्र में बीजेपी हर हाल में तीन टारगेट पूरे करना चाहती है...

पहला- परिसीमन बिल पास करवाना

जिसके तहत लोकसभा सीटों की संख्या 545 से बढ़कर 850 हो जाएगी, राज्यों की सीटें भी बढ़ सकती हैं. पर इसके लिए लोकसभा और राज्यसभा दोनों जगह दो तिहाई बहुमत चाहिए, या फिर उस दिन सांसदों की मौजूदगी कम हो तो काम बन सकता है. जानकार कहते हैं परिसीमन बिल चूंकि महिला आरक्षण से भी जुड़ा है, इसलिए कई विपक्षी पार्टियां भी इसमें मोदी का साथ दे सकती हैं...फिलहाल

विशेष बहुमत से NDA 41 सीट दूर है, TMC से आए 20 और उद्धव शिवसेना के 6 सांसदों को जोड़ लें तो संख्या 319 पहुंचती है, जबकि एनडीए को इसके लिए 360 सांसद चाहिए 
इसके अलावा इनका दूसरा टारगेट है उस बिल को पास करवाना, जिसके तहत सीएम, पीएम या मंत्री कोई भी हो, उस पर दोष साबित होता है और वो 30 दिन जेल में रहता है तो उसे इस्तीफा देना होगा, जैसे केजरीवाल ने जेल से सरकार चलाने की जिद्द छेड़ी थी, ऐसे संकट के लिए ये काम आ सकता है...जबकि तीसरा टारगेट है विपक्ष के हंगामे को रोककर कामकाज बढ़ाना, क्योंकि बीते कई सत्र यूं ही बर्बाद हो चुके हैं, जहां जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये एक दिन में खर्च होते हैं....पर चूंकि अगले साल पांच राज्यों में चुनाव है, इसलिए मानसून सत्र में उन राज्यों का मुद्दा भी खास तौर पर गूंज सकता है, और 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलने वाले इस संसद सत्र की तस्वीर कुछ इस तरह हो सकती है...

संसद में मानसून सत्र में क्या होने वाला है ?
जरा सोचिए, जिस संसद में बीजेपी ने राम मंदिर पर कभी कांग्रेस को घेरा, अब उसी संसद में राम मंदिर पर विपक्ष बीजेपी को घेरने वाला है, संसद की जिस पाठशाला से शिक्षा की नीतियां बनती हैं, उसी संसद में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग जोर पकड़ने वाला है, ऑपरेशन सिंदूर पर अपनी पीठ थपथपाने वाली सरकार शहीदों के नाम पर घिरने वाली है, और इंडिया गठबंधन के सांसदों के तोड़फोड़ से लेकर अंडमान निकोबार प्रोजेक्ट तक का मुद्दा सुर्खियों में रहने वाला है, जिस पर विपक्ष के नेता अभी से किताब के पन्ने पलटने लगे हैं, जबकि मोदी सरकार के अधिकारी संभावित जवाब तैयारी करने में व्यस्त हैं...क्योंकि मंत्री जो जवाब सदन में देते हैं, उसे तैयार अधिकारी ही करते हैं...

हंगामा ज्यादा और काम कम ?
इस संसद सत्र में तो विपक्ष के पास पब्लिक से जुड़े इतने मुद्दे हैं कि अगर वो सरकार को घेरने की सही कोशिश कर पाई तो फिर संसद सत्र में काम कम और हंगामे की तस्वीर ज्यादा दिख सकती है...इस बार आरोप सिर्फ मोदीराज में हुई घटनाओं पर नहीं, बल्कि आम जनता को हो रही तकलीफों पर भी है...क्योंकि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाए जाने का मुद्दा इस वक्त सबसे ज्यादा सुर्खियों में है, आम जनता को इससे हो रहे नुकसान की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल है, नितिन गडकरी की भूमिका को लेकर सवाल उठने शुरू हो चुके हैं...इसीलिए गडकरी को भी संसद में आधिकारिक जवाब देना पड़ सकता है, जहां बोला गया एक-एक लफ्ज रिकॉर्ड में रखा जाएगा, इसलिए इस बात का इंतजार भी पूरे देश को है कि इस पर आगे की रणनीति क्या होती है...

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