क्या यूपी में कुछ जगहों पर खाकी बेलगाम हो गई है, क्या उन पुलिसकर्मियों को कायदे की भाषा सीखाने की जरूरत है, जो कानून को ताक पर रखकर काम कर रहे हैं, बलिया में रहने वाले कामजी गोंड के बेटे विशाल ने जो आरोप लगाया है, वहां से जो तस्वीरें सामने आई है, उसने ऐसे कई सवाल खड़े कर दिए हैं...ये तस्वीरें उस जगह की हैं, जहां परिजनों ने पोल रखकर सड़क पर जाम लगाया, पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की तो ASP से लेकर SDM तक भागे-भागे पहुंचे और हरसंभव कार्रवाई का आश्वासन दिया, दारोगा और पुलिस समेत 6 लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ, तब जाकर जाम खुला..पीड़ितों की शिकायत के हवाले से न्यूज 18 अपनी रिपोर्ट में दावा करता है...
पुलिस ने थाने में की मारपीट
7 जुलाई को गांव में दो पक्षों में विवाद हुआ था, जिसे लेकर 8 जुलाई की दोपहर दो सिपाहियों ने कामजी गोंड को घर से उठाया, थाने लेकर गए, और पूछताछ के बहाने उनसे मारपीट की गई, शाम 4 बजे उन्हें घर पहुंचाने की बजाय विरोधी पक्ष की पैरवी कर रहे ग्राम प्रधान लालू सिंह और ड्राइवर मनीष यादव के हवाले कर दिया. शाम 6 बजे हमलोगों को पता चला कि वो ठगनी माई के डेरा के पास बेहोश पड़े हैं, उसके बाद उन्हें घर लाकर दो दिन इलाज कराया, हालत बिगड़ने पर वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में ले गए, जहां से बलिया जिला अस्पताल ट्रांसफर किया गया, फिर वहां से BHU ट्रांसफर कर दिया गया, लेकिन 11 जुलाई को उन्होंने दम तोड़ दिया. वाराणसी से लौटते वक्त पुलिस ने दुर्व्यवहार किया. यानि आपसे झगड़े में कहानी इतनी बढ़ गई कि थाने में थर्ड डिग्री तक के आरोप लगने लगे, हालांकि बलिया पुलिस इस मामले में अलग कहानी बताती है.. यानि दोनों दावे अलग-अलग हैं, फिलहाल पुलिस ने पीड़ित परिवार को कार्रवाई का आश्वासन दिया है, 6 आरोपियों पर मुकदमा दर्ज किया है, जिसमें
सब इंस्पेक्टर सचिन सरोज और सिपाही अंकित सिंह समेत ग्राम प्रधान आशुतोष सिंह ऊर्फ लालू, ड्राइवर मनीष यादव, सूरज कनौजिया और सूरज कनौजिया के एक अज्ञात रिश्तेदार का नाम शामिल है
अब इनकी गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद क्या नई कहानी खुलती है, वो तो पुलिस ही बता पाएगी, पर सवाल है अगर पुलिस की गलती नहीं थी, पुलिस ने पूछताछ करके छोड़ दिया था तो फिर सिपाही और दारोगा को सस्पेंड क्यों किया गया. अभी मेरठ में दलित छात्रा के साथ हुई घटना का मामला शांत भी नहीं हुआ कि बलिया में एक नई घटना हो गई, जो कई सवालों को जन्म दे रहा है....और विपक्षी नेता ये पूछ रहे हैं कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं तो आम जनता क्या करेगी ?