नई दिल्ली: मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने बुधवार को भारत सरकार से माफी मांगी है. उन्होंने प्लेटफॉर्म पर बच्चों से जुड़े यौन शोषण सामग्री (CSAM) वाले विज्ञापन, डीपफेक कंटेंट और संचालन में हुई गलतियों के लिए खेद जताया. मीडिया सूत्रों के अनुसार, कंपनी ने स्वीकार किया कि कुछ खास तरह के कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए उन्हें काफी पैसा मिला था.
यह तब हुआ जब मेटा के अधिकारियों ने सरकार के साथ बैठक की. सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि मेटा के पब्लिक पॉलिसी हेड जोएल कापलान सहित अधिकारियों ने मुलाकात की और गुरुवार को फिर बैठक होगी. सरकार चाहती है कि मेटा CSAM से निपटने के लिए उठाए गए कदमों और एआई से बने कंटेंट की निगरानी के बारे में स्पष्टीकरण दे.
सरकार ने चेतावनी दी है कि आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत सुरक्षित बंदरगाह (सेफ हार्बर) सुरक्षा पर सवाल उठ सकते हैं, क्योंकि प्लेटफॉर्म सिर्फ तीसरे पक्ष का कंटेंट होस्ट नहीं करते बल्कि उसे चुनकर यूजर्स तक पहुंचाते हैं. संसदीय समिति ने भी इस मुद्दे पर गंभीर रुख अपनाया था और माफी न मिलने पर सुरक्षा छिनने की चेतावनी दी थी.
इसके अलावा सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक वीडियो को फेसबुक से अस्थायी रूप से हटाए जाने पर भी आपत्ति जताई. वीडियो में पीएम ने परीक्षा विवाद और पेपर लीक पर कार्रवाई का जिक्र किया था, जिसे करीब पांच-छह घंटे बाद बहाल किया गया.