क्या उत्तर प्रदेश में बुलडोजर का खौफ खत्म हो गया है? क्या संगठित माफिया अब भी खुले में सांस ले रहे हैं, क्या राजनीतिक पार्टियों से संरक्षण मिलने वालों पर पुलिस तगड़ा एक्शन नहीं ले रही है, क्या सिर्फ छोटे-मोटे लोगों की थाने में परेड करवाकर पुलिस वाहवाही लूट रही है? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि योगीराज के इतिहास में शायद पहली बार ऐसा हुआ है, जब एक डिप्टी सीएम का काफिला रुकवाकर एक परिवार को शिकायत देनी पड़ी. अपनी जान बचाने की गुहार लगानी पड़ी.
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य (Deputy CM Keshav Prasad Maurya) जो बड़े सुकून से रविवार रात मिर्जापुर के दौरे पर थे, वो ये देखकर दंग रह गए कि कुछ लोग हाथों में बैनर लिए उनसे गाड़ी रोकने की गुजारिश कर रहे हैं. सुरक्षा के लिहाज से ये बड़ा मसला हो सकता था, लेकिन केशव मौर्य (Keshav Maurya) ने सुरक्षा की बजाय समस्या को सुनना जरूरी समझा और उसके बाद जो पता चला वो चौंका देने वाला था.
तस्वीर इतनी हैरान करने वाली थी कि हो सकता है सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) मिर्जापुर के डीएम और एसपी को तुरंत तलब कर लें, इस तस्वीर में केशव प्रसाद मौर्य कार के बाहर खड़े होकर आवेदन लेते हैं और कहते हैं माफिया-माफिया होता है. अब केशव ने ये बात क्यों कही, उसकी वजह इस बैनर से आप समझ सकते हैं. जिसपर लिखा है उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जी समाजवादी पार्टी के भूमाफियाओं (यादव) मझवां गांव के गुंडों से निजात दिलाएं (UP Mafia News).
पूरी कहानी 56 बीघे जमीन की है, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का काफिला रुकवाने वाला परिवार कहता है कि हमारे पास कोई और विकल्प नहीं बचा था, वो तो डिप्टी सीएम साहब ने हमें देखकर अपनी कार रुकवा ली, वरना हमारी सुनने वाला कोई नहीं है. पीड़ित बृजेश गिरी का कहना है कि हमारी लालगंज क्षेत्र में कई बीघा जमीन है, परंतु गांव के ही कुछ यादव दबंग परिवार के लोग जो पूर्व प्रधान रह चुके हैं. हमारी भूमि पर कब्जा कर लिए हैं. उसमें वह खेती कर रहे है. हमारी जमीन होने के बावजूद हम लोग भूखों मर रहे हैं. तहसीलदार, एसपी और डीएम सबसे गुहार लगा चुके हैं, लेकिन किसी ने एक्शन नहीं लिया, क्योंकि वो लोग दबंग हैं.
अब सवाल ये उठता है कि इन दबंगों से जमीन खाली करवाने के लिए योगी बुलडोजर कब भेजेंगे, आवेदन में लिखे एक-एक आरोप अगर सही निकले तो फिर वो चाहे कितना भी बड़ा माफिया हो या किसी नेता का दुलारा हो, बुलडोजर एक्शन के लिए उसे तैयार रहना चाहिए, लेकिन बुलडोजर एक्शन से भी बड़ा सवाल ये है कि इतनी सख्ती के बाद भी वो लोग कौन हैं, जिन्हें न तो पुलिस से डर लग रहा है, और ना ही बुलडोजर से. क्या योगी सरकार को भूमाफियाओं के खिलाफ और सख्त एक्शन लेने की जरूरत है, इससे ज्यादा सख्त एक्शन तो शायद ही किसी प्रदेश में हो.
चाहे वो अतीक और मुख्तार जैसे भूमाफिया रहे हों या आजम खान जैसे लोग, हर किसी पर योगी की पुलिस ने ऐसा एक्शन लिया कि उनकी अगली पीढ़ी ऐसा कुछ करने से पहले सौ बार सोचेगी. और जब इतने बड़े लोगों पर एक्शन होता है तो छोटे लोग या तो रास्ता बदल लेते हैं, या फिर प्रदेश छोड़ देते हैं, पर मिर्जापुर के पूर्व प्रधान का ये परिवार योगीराज में भी खुलेआम दबंगई दिखा रहा है, ना सिर्फ दबंगई कर रहा है, बल्कि शिकायत का समाधान भी नहीं होने दे रहा है, कई बार गांव के जमीनी मामलों में शिकायती पत्र में लिखा कुछ और होता है और कहानी कुछ और होती है, इस केस की सच्चाई क्या है, वो डिप्टी सीएम के पास पहुंची जांच रिपोर्ट बताएगी, पर केशव ने जिस हिसाब से योगी वाले अंदाज में आश्वासन दिया है, क्या वो आपको भी पसंद आया.