17 अगस्त की शाम जब राहुल गांधी बिहार में वोट चोरी का राग अलाप रहे थे, पूरे देश के मीडिया चैनल चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर चर्चा कर रहे थे, पीएम मोदी बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों के साथ दिल्ली में मीटिंग कर रहे थे, मीटिंग के दौरान वो पहली बार डायरी पर कुछ लिखते भी नजर आए, मीटिंग में गृहमंत्री शाह और मोदी सरकार में मंत्री जेपी नड्डा समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे, काफी देर तक चली मीटिंग में कई नामों पर चर्चा हुई, कुछ दिनों पहले दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने मोदी-शाह से मुलाकात की थी, थावरचंद गहलोत, ओम माथुर और हरिवंश नारायण सिंह का नाम भी चर्चा में था, पर आखिर में मुहर सीपी राधाकृष्णन पर लगी, जिसके बारे में मीटिंग के बाद जेपी नड्डा ने जानकारी दी, खास बात ये है कि इधर जब इनके नाम पर दिल्ली में मंथन हो रहा था, मुंबई में ये सिद्धिविनायक मंदिर में दर्शन कर रहे थे. जिसके बाद कई लोग कह रहे हैं भगवान ने इन्हें बड़ा आशीर्वाद दे दिया है.
कौन हैं सीपी राधाकृष्णन (हेडर)
20 अक्टूबर 1957 को तमिलनाडु के तिरुपुर में जन्मे सीपी राधाकृष्णन का RSS से जुड़े रहे हैं
बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में ग्रेजुएट हैं, साल 1974 में जनसंघ के राज्य कार्यकारिणी के मेंबर बने
1996 में तमिलनाडु बीजेपी के सचिव बने, 1998 और 1999 में दो बार लगातार सांसद चुने गए
पुडुचेरी के उपराज्यपाल के अलावा झारखंड और तेलंगाना के भी राज्यपाल की जिम्मेदारी संभाली
फिलहाल सीपी राधाकृष्णन महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं, कहा जाता है इनकी छवि विवादों से दूर वाली रही है, हालांकि बीते दिनों जब महाराष्ट्र में भाषा विवाद हुआ तो इन्होंने कहा थाअगर हम इस तरह की नफरत फैलाएंगे, तो कौन आएगा और निवेश करेगा. हम महाराष्ट्र को नुकसान पहुंचा रहे हैं. मैं हिंदी समझने में असमर्थ हूं और यह मेरे लिए एक बाधा है. हमें अधिक से अधिक भाषाएं सीखनी चाहिए और हमें अपनी मातृभाषा पर गर्व होना चाहिए. हालांकि तब इनके बयान पर कई लोगों ने सवाल भी उठाए थे, एक नेता ने कहा था मराठी महाराष्ट्र में नहीं तो क्या भूटान में बोली जाएगी, पर राजनीति के जानकार कहते हैं बीजेपी ने इन्हें उपराष्ट्रपति उम्मीदवार बनाकर साउथ की सियासत में पार्टी को मजबूत करने का बड़ा रास्ता निकाल लिया है, क्योंकि इनकी पकड़ तमिलनाडू और केरल में अच्छी मानी जाती है, पहले मोदी ने संसद में सेंगोल की स्थापना कर और फिर काशी-तमिल संगम करवाकर बीजेपी को साउथ में मजबूत करने की कोशिश की और अब सीपी राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाकर दक्षिण भारत में ये संदेश देने की कोशिश की है कि बीजेपी सिर्फ उत्तर भारत की पार्टी नहीं है. साथ ही बीजेपी के उन नेताओं को भी हाईकमान ने समझा लिया है जो इस बात के विरोध में थे कि अगर जेडीयू के हरिवंश नारायण को राज्यसभा में उपसभापति बनाया और अभी के हालात में गठबंधन में कोई कहानी गड़बड़ हुई तो नुकसान बड़ा हो सकता है, यानि बीजेपी ने बड़ी सोच-समझकर उम्मीदवार चुना है. अब 9 सितंबर को चुनाव होने हैं, और संख्याबल के हिसाब से एनडीए उम्मीदवार की जीत तय मानी जा रही है.