पूरा देश जब रामनवमी के धुन में मग्न था, अयोध्या में भव्य उत्सव चल रहा था, तब हैदराबाद में एक हिंदू शेरनी रोने पर मजबूर थीं, क्योंकि वहां की कांग्रेस सरकार में पुलिसबलों ने रामनवमी पर प्रोग्राम की अनुमति ही नहीं दी, जिसके बाद माध्वी लता को इतना गुस्सा आया कि वो मीडिया के सामने ये कहने लगीं कि क्या रमजान में इन्होंने मस्जिदें बंद कर दी थी, जब ये लोग रमजान मना सकते हैं तो हम लोग रामनवमी क्यों नहीं मना सकते.
माध्वी लता ने टी राजा की बात की, टी राजा हैदराबाद की एक सीट से बीजेपी के विधायक हैं, उनके कई बयान आपने सोशल मीडिया पर सुने भी होंगे, जिसमें वो हिंदुत्व की बातें करते नजर आते हैं, और इस मामले में अब स्थानीय विधायक टी राजा सिंह का कहना है कि
"बरसों से हमारी रामनवमी की शोभा-यात्रा भक्ति का प्रतीक रही है, जिसमें सिर्फ तेलंगाना ही नहीं बल्कि देश भर से लाखों रामभक्त आते रहे हैं. लेकिन हमें अनुमति नहीं मिली, यहां की कांग्रेस सरकार जो केसीआर के नक्शेकदम पर चल रही है, वो ठीक नहीं कर रही है."
हालांकि नेता चाहे कुछ भी कहें, पर सरकारें चुनाव आयोग का आदेश मानने को बाध्य हैं और चुनाव में ध्रुवीकरण की बात अगर कोई करेगा तो फिर उसके ऊपर एक्शन भी तय है, जैसा कि राजस्थान की बीजेपी सरकार में भी देखने को मिला. वहां के जयपुर शहर लोकसभा क्षेत्र से कॉन्ग्रेस उम्मीदवार प्रताप सिंह खाचरियावास के वकील ने डीएम को एक लिखित शिकायत दी थी जिसमें लिखा था कि
'परकोटा के बाजारों में लोकसभा चुनाव 2024 में एक विशेष पार्टी को फायदा पहुँचाने के लिए भगवा ध्वज लगाए गए हैं, ये आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है.'
लेटर पढ़ते ही नगर निगम ने रातों-रात झंडे उतरवा दिएष जिसे लेकर हवामहल के विधायक बालमुकमंद आचार्य इतना गुस्सा हो गए कि वो ये तक कहने लगे कि कांग्रेस को भगवा ध्वज और श्रीराम से आपत्ति है, चुनावी दौर में ऐसे कई बयान को सुनने को मिलेंगे, पर इन बयानों पर न सोचकर आपको अपनी बुद्धि लगानी है फिर फाइनल फैसला करना है. क्योंकि अब तो ममता बनर्जी की सरकार में रामनवमी की छुट्टी मिलने लगी है, पर कुछ जगह अभी भी शायद वक्त नहीं बदला.