नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ चल रहे मानहानि मुकदमे में एक कदम पीछे खींचती नजर आईं. दिल्ली हाईकोर्ट में उन्होंने अपने उस सोशल मीडिया पोस्ट को हटाने की सहमति जता दी, जिसमें उन्होंने दुबे को “फेक डिग्री किस्म के आदमी” कहा था. साथ ही पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने भी पॉडकास्ट में दुबे के लिए इस्तेमाल किए गए “ब्लैकमेलिंग किस्म के आदमी” वाले शब्द को ब्लॉक कराने की बात कही. जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच के सामने मोइत्रा और गर्ग की ओर से पेश अधिवक्ता समुद्र सारंगी ने यह बयान दिया. अदालत ने दोनों के बयानों को दर्ज किया और मोइत्रा तथा गर्ग के नाम समन भी जारी कर दिया.
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान जस्टिस गेडेला ने “ब्लैकमेलर” शब्द पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह असंयमित और पूरी तरह अपमानजनक है. उन्होंने टिप्पणी की, “यदि कोई आपको ब्लैकमेलर कहे तो क्या आप हल्के में लेंगे? ये दो ऐसे व्यक्ति हैं जिनकी प्रतिष्ठा है. आप किसी के लिए ऐसा शब्द इस्तेमाल नहीं कर सकते.” अदालत ने स्पष्ट किया कि बाकी मुद्दों पर बहस हो सकती है, लेकिन अपमानजनक भाषा बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
पूरा मामला क्या है?
मामला एक पॉडकास्ट से शुरू हुआ, जिसमें सुभाष चंद्र गर्ग ने दुबे पर ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया था और एलआईसी से जुड़े एक मामले में दबाव बनाने का जिक्र किया था. मोइत्रा ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा था, “ये ब्लैकमेलिंग किस्म का आदमी है. हां 100 फीसदी सही सुभाष चंद्र गर्ग. फेक डिग्री किस्म के आदमी भी. उनके मानहानि केस/लोकपाल/ईडी/सीबीआई धमकियों से मत डरिए.” दुबे ने इन टिप्पणियों को झूठा और मानहानिकारक बताते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में मुकदमा दायर किया था.
महुआ का रुख
अदालत में मोइत्रा की ओर से कहा गया कि उनका और दुबे का विवाद राजनीतिक है और वह ट्वीट हटा देंगी, लेकिन दुबे की डिग्री पर सवाल उठाने का अपना अधिकार जारी रखेंगी. गर्ग की ओर से बताया गया कि पॉडकास्ट किसी और ने पब्लिश किया है और वे होस्ट से “ब्लैकमेलर” शब्द को म्यूट कराने की गुजारिश करेंगे. यह मामला राजनीतिक बयानबाजी और सोशल मीडिया पर अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर चर्चा में आ गया है. अदालत की सख्ती के बाद दोनों पक्षों ने आपत्तिजनक सामग्री हटाने पर सहमति जताई है.