दिसपुर: असम कैबिनेट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए राज्य में मुस्लिम शादियों के पंजीकरण को अनिवार्य कर दिया है. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बैठक के बाद जानकारी देते हुए बताया कि ‘असम मुस्लिम विवाह पंजीकरण (अनिवार्य) नियम, 2026’ को मंजूरी दे दी गई है.
अब सरकार द्वारा नियुक्त रजिस्ट्रार ही मुस्लिम विवाहों का पंजीकरण करेंगे. सरमा ने कहा कि पहले सरकार ने काजियों के जरिए मुस्लिम शादियों के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाई थी, लेकिन उसकी जगह कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बनाई गई थी. अब इस कमी को दूर करते हुए पूरे राज्य में एकसमान रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया लागू की जा रही है. ये नियम असम मुस्लिम विवाह और तलाक अनिवार्य पंजीकरण अधिनियम, 2024 की धारा 25 के तहत बनाए गए हैं.
कैबिनेट के अन्य बड़े फैसले
कैबिनेट बैठक में कई अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं और निर्णयों को भी मंजूरी मिली. स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं को आधार बनवाने के लिए 31 मार्च 2027 तक एकमुश्त छूट दी गई है. इससे बैंक लोन जैसी सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी. 796.88 करोड़ रुपए के SWIFT प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई, जिसमें एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) 637 करोड़ रुपए देगा. इससे 102 बीलों का विकास होगा.
JK लक्ष्मी सीमेंट राज्य में क्लिंकर यूनिट और चार ग्राइंडिंग यूनिट लगाएगी. इससे करीब 2 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा. अक्टूबर में NFSA लाभार्थियों को 30 रुपए प्रति किलो चीनी उपलब्ध कराई जाएगी. हाजो में औद्योगिक एस्टेट के लिए 504 बीघा और श्रीभूमि में कृषि कॉलेज के लिए 256 बीघा जमीन आवंटित की गई.
इसके अलावा कैबिनेट ने 1 सितंबर से कुछ मस्टर रोल, कैजुअल और फिक्स्ड-पे कर्मचारियों को फिक्स्ड पेमेंट देने, नवंबर में दो स्वायत्त परिषदों के चुनाव कराने और UNNATI 2024 के तहत पात्र विनिर्माण इकाइयों को सब्सिडी देने के फैसले भी लिए. असम सरकार के इन फैसलों से राज्य में विवाह पंजीकरण व्यवस्था को और व्यवस्थित बनाने के साथ-साथ रोजगार, कृषि और महिलाओं के सशक्तिकरण पर भी जोर देने की कोशिश साफ दिख रही है.