कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बगावत का सिलसिला अब और तेज हो गया है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सबसे पुराने और विश्वसनीय सहयोगियों में शुमार पूर्व मंत्री मदन मित्रा ने बुधवार को पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया और बागी गुट में शामिल हो गए.
मदन मित्रा टीएमसी की स्थापना के समय से ममता बनर्जी के साथ रहे हैं. उन्होंने 1998 में कांग्रेस छोड़कर ममता के साथ नई पार्टी बनाने में अहम भूमिका निभाई थी. परिवहन मंत्री रह चुके मदन मित्रा अपनी अनोखी टिप्पणियों और रंग-बिरंगे कपड़ों के लिए भी चर्चित रहे हैं.
मदन मित्रा ने बागी गुट के नेता और विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी से मुलाकात के बाद यह फैसला लिया. मीडिया से बातचीत में उन्होंने सीधे ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी की बदहाली के लिए वे जिम्मेदार हैं.
मदन मित्रा ने कहा, ''मैंने अभिषेक से सुझाव दिया था कि छह महीने या एक साल के लिए पीछे हट जाएं, पार्टी को मजबूत होने दें, फिर आकर अपनी जगह संभाल लें. लेकिन उन्होंने मना कर दिया. पार्टी डूब रही है, फिर भी फैसला यही है कि बाकी सब मर जाएं, लेकिन अभिषेक को बचाना है. यह बेहद दुखद है. पार्टी सबकी है, लेकिन अब केवल एक व्यक्ति की होकर रह गई है.''
यह घटना ममता बनर्जी के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर रही है. कुछ दिनों पहले ही अनुब्रत मंडल और रवींद्रनाथ घोष जैसे अन्य करीबी नेता भी बागी खेमे में जा चुके हैं. बंगाल चुनाव में बुरी हार के बाद TMC पहले ही गंभीर संकट का सामना कर रही है. करीब 80 विधायकों में से 60 ने बागी गुट जॉइन कर लिया है, जबकि 20 लोकसभा सांसद भी अलग हो चुके हैं.
मदन मित्रा का रुख बदलना TMC के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है. इस बीच ED ने नगरपालिका भर्ती घोटाले के मामले में मदन मित्रा की पत्नी और दो बेटों को समन भेजा था, जिसके ठीक एक दिन बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी. राजनीति में यह घटनाक्रम TMC की आंतरिक कलह को और उजागर कर रहा है.