पटना: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव बीजेपी के लिए गढ़ बचाने की लड़ाई बन चुका है, लेकिन पार्टी के नए उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा के चुनावी हलफनामे ने तूफान खड़ा कर दिया है. 10वीं पास करने के 12 साल बाद सीधे ग्रेजुएशन की डिग्री दिखाने पर सवालों की बौछार हो रही है. 13 जुलाई को नामांकन दाखिल करते समय नीरज सिन्हा ने चुनाव आयोग के समक्ष अपना हलफनामा जमा किया.
इसमें उनकी शैक्षणिक योग्यता का विवरण दिया गया है कि 2012 में बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (BSEB) से हाई स्कूल (मैट्रिक) पास किया और 2024 में मगध महाविद्यालय, सकुराबाद, जहानाबाद से ग्रेजुएशन पूरा किया. हलफनामे में 12वीं (इंटरमीडिएट) की पढ़ाई का कोई जिक्र नहीं है. इससे राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई है कि क्या बिना इंटरमीडिएट के सीधे स्नातक डिग्री हासिल की जा सकती है?
पहले भी बायोडेटा पर उठे थे सवाल
यह पहला विवाद नहीं है. उम्मीदवार के रूप में घोषणा के बाद जारी बायोडेटा में दावा किया गया था कि नीरज सिन्हा ने महज 12 साल की उम्र (वर्ष 2006) में भाजपा की प्राथमिक सदस्यता ले ली थी. विवाद बढ़ने पर पार्टी ने नया बायोडेटा जारी कर इस जानकारी को हटा दिया, लेकिन स्पष्टीकरण नहीं दिया. नीरज सिन्हा से इस मुद्दे पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. भाजपा प्रवक्ता ने भी इस बारे में कोई जानकारी होने से इनकार कर दिया.
बांकीपुर उपचुनाव का समीकरण
बांकीपुर सीट भाजपा का पारंपरिक गढ़ मानी जाती है. पहले उम्मीदवार अभिषेक सिन्हा (बंटी) के नामांकन के एक दिन बाद चुनाव लड़ने से मना करने के बाद पार्टी ने नीरज कुमार सिन्हा को अंतिम समय में टिकट दिया. यहां उनका मुकाबला जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर से है, जो इस उपचुनाव के जरिए अपनी चुनावी वापसी की कोशिश कर रहे हैं. नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, रविशंकर प्रसाद समेत कई बड़े नेता नीरज सिन्हा के समर्थन में उतरे थे.