ममता बनर्जी की सुप्रीम कोर्ट में बड़ी हार, FIR रोकी, छापेमारी के CCTV फुटेज संरक्षित करने का आदेश

Amanat Ansari 15 Jan 2026 04:35: PM 2 Mins
ममता बनर्जी की सुप्रीम कोर्ट में बड़ी हार, FIR रोकी, छापेमारी के CCTV फुटेज संरक्षित करने का आदेश

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बड़ा झटका देते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर त्वरित कार्रवाई की. कोर्ट ने राजनीतिक सलाहकार फर्म I-PAC के दफ्तर में ED की छापेमारी में कथित बाधा डालने के मामले में हस्तक्षेप किया. न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने पश्चिम बंगाल सरकार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, डीजीपी राजीव कुमार और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी किया.

ED ने आरोप लगाया था कि 8 जनवरी को I-PAC के दफ्तर (सॉल्ट लेक, कोलकाता) और इसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी के दौरान राज्य सरकार और पुलिस ने बाधा डाली. कोर्ट ने कहा, "देश में कानून का शासन बनाए रखने और प्रत्येक संस्था को स्वतंत्र रूप से काम करने देने के लिए इस मुद्दे की जांच जरूरी है, ताकि अपराधियों को किसी राज्य की कानून प्रवर्तन एजेंसियों की ढाल के नीचे संरक्षण न मिले." पीठ ने इसे "बहुत गंभीर मामला" करार दिया.

कोर्ट के मुख्य आदेश:

  • पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा ED अधिकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR को अगली सुनवाई (3 फरवरी 2026) तक रोक दिया गया.
  • राज्य सरकार को 8 जनवरी की पूरी CCTV फुटेज (I-PAC परिसर और आसपास के क्षेत्रों की) को बिना किसी बदलाव के सुरक्षित रखने का निर्देश.
  • पश्चिम बंगाल सरकार को ED की याचिका पर 3 दिनों (कुछ रिपोर्टों में 2 सप्ताह) के अंदर जवाब (काउंटर एफिडेविट) दाखिल करने को कहा.
  • ED ने CBI जांच की भी मांग की है.

ED की प्रमुख दलीलें

  • यह राज्य में केंद्रीय एजेंसियों के साथ "शॉकिंग पैटर्न" का हिस्सा है.
  • ममता बनर्जी ने खुद मौके पर पहुंचकर "महत्वपूर्ण सबूत" हटाए (चोरी की), जिसके साथ डीजीपी मौजूद थे.
  • कलकत्ता हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान "मॉबोक्रेसी" (भीड़तंत्र) हुआ, जिससे कोर्ट को स्थगित करना पड़ा.
  • ऐसे मामलों से केंद्रीय एजेंसियों का मनोबल गिरता है और कानून का शासन खतरे में पड़ता है.

ममता बनर्जी पक्ष की दलीलें (वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल द्वारा):

  • मामला पहले कलकत्ता हाई कोर्ट में सुना जाना चाहिए.
  • ED ने 2024 फरवरी के बाद 2 साल तक कोई कार्रवाई नहीं की, फिर चुनाव के बीच "अचानक" छापेमारी क्यों?
  • कोई अवैध जब्ती नहीं हुई, सिर्फ पार्टी की चुनावी रणनीति से जुड़े डेटा थे.

इसी के साथ कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर ऐसे मामले अनसुलझे रहे तो विभिन्न राज्यों में "कानून-व्यवस्था की स्थिति" (lawlessness) पैदा हो सकती है. अगली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को होगी. बता दें कि भ्रष्टाचार को लेकर I-PAC कार्यालय में ईडी छापेमारी करने पहुंची थी, जिसका मामता बनर्जी ने कड़ा विरोध किया था. तभी से यह मामला गरमाया हुआ है.

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