मुंबई: अभिनेत्री-मॉडल मंदाना करीमी ने हाल ही में बोमन ईरानी के एक सटायर वीडियो की आलोचना की है. इस वीडियो में बोमन ईरानी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बारे में मजाक किया था कि ट्रंप ईरानियों से मिलना चाहते हैं ताकि शांति स्थापित की जा सके. मंदाना करीमी ने बोमन ईरानी के इस टाइमिंग पर सवाल उठाया और ईरान में चल रहे संकट पर उनकी चुप्पी को लेकर नाराजगी जताई. उन्होंने अपने हमवतनों की सालों से हो रही पीड़ा पर प्रकाश डाला.
तेहरान में जन्मी मनीझे करीमी (मंदाना करीमी) पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान ईरान के लोगों का समर्थन करने के लिए काफी मुखर रहीं हैं. उन्होंने पारसी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले बोमन ईरानी से निराशा जताते हुए कहा कि उन्होंने सालों से ईरान में हो रहे दमन और हिंसा पर चुप्पी साधे रखी, और अब अचानक सटायर के जरिए ईरान पर बोल रहे हैं.
बोमन ईरानी के इंस्टाग्राम पोस्ट पर मंदाना ने लिखा, "बोमन ईरानी सर... अचानक आपको ईरान के बारे में बहुत कुछ कहना है. इंटरेस्टिंग टाइमिंग. सालों से ईरानियों को गिरफ्तार किया जा रहा है, फांसी दी जा रही है, उनकी आवाज दबाई जा रही है. हजारों लोग मारे गए. परिवार बिखर गए और लोग जैसे मैं हमने इसे जिया है. हमने इसके बारे में बोला है. लेकिन अब... एक वीडियो आ गया है. अब चिंता जताई जा रही है. अब गैस की कीमतों, राजनीति और 'मेरे घर आओ' पर ह्यूमर किया जा रहा है."
हालांकि बोमन ईरानी ने मंदाना के इन तीखे कमेंट्स का कोई जवाब नहीं दिया, लेकिन कई अन्य लोगों ने उनके सटायर का बचाव किया और कहा कि यह सिर्फ ह्यूमर के लिए था. मंदाना ने जवाब में इसे पाखंड बताया. उन्होंने कहा कि जब ईरान में बड़े पैमाने पर मौतें और दमन हो रहा था तब चुप्पी साधे रहे, लेकिन अब जब ग्लोबल पॉलिटिक्स और गैस की कीमतें प्रभावित हो रही हैं तो अचानक चिंता जताई जा रही है. मंदाना ने आगे कहा कि जो लोग खुद को ईरानी या पारसी कहते हैं, लेकिन जब हजारों लोग मारे जा रहे थे या जेलों में बंद थे तब चुप रहे, और अब केवल अपनी व्यक्तिगत चिंताओं के कारण बोल रहे हैं.
यह सिलेक्टिव आउट्रेज है, असली सहानुभूति नहीं. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में अभी भी बहुत से लोग बिना आवाज के हैं, इंटरनेट ब्लैकआउट चल रहा है और परिवारों का संपर्क कट गया है. मंदाना ने अपने लोगों और देश की तरफ से बोलने का अधिकार जताया और किसी भी तरह से उन्हें चुप कराने या लेक्चर देने की कोशिशों को खारिज किया.
उन्होंने दोहराया कि बड़े पैमाने पर होने वाले दर्द और पीड़ा को नजरअंदाज करके अचानक सिर्फ गैस की कीमतों पर चिंता जताना साफ तौर पर पाखंड है. जिन आलोचकों ने उनकी सोच पर सवाल उठाया, उन्हें जवाब देते हुए मंदाना ने स्पष्ट किया कि वे ईरान में पैदा हुईं और 18 साल तक वहां रही हैं. उन्होंने खुद "गिरफ्तारियों और उल्लंघनों" का सामना किया है.
उनका पूरा परिवार अभी भी ईरान में ही रहता है. उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले तक उनके पास ईरानी पासपोर्ट था और उन्हें विदेश में आजादी से रहने के लिए अपनी "आजादी खरीदनी" पड़ी थी. मंदाना ने आखिर में कहा कि लोग उनकी बात को और उनकी स्थिति को समझें, जिस वास्तविकता से वे बोल रही हैं.