नई दिल्ली: भारतीय रेलवे की जमीन पर अवैध अतिक्रमण की समस्या अब एक गंभीर सुरक्षा और विकास चुनौती बन चुकी है. सूचना का अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त ताजा आंकड़ों ने पूरे देश को हैरान कर दिया है. रेलवे की लगभग 1068.54 हेक्टेयर जमीन पर अवैध कब्जा है, जो 42 नरेंद्र मोदी स्टेडियम (अहमदाबाद) के कुल क्षेत्रफल के बराबर है.
कितना विशाल है यह अतिक्रमण?
आंकड़ों में बढ़ोतरी का रुख
RTI जवाब के अनुसार, वर्ष 2020-21 में अतिक्रमित जमीन 810.31 हेक्टेयर थी, जो 2024-25 में बढ़कर 1,068.54 हेक्टेयर हो गई. यानी मात्र पांच साल में 32 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. ये आंकड़े मार्च 2026 में संसद में दिए गए सरकारी बयान से भी मेल खाते हैं, जिसमें कुल रेलवे भूमि (लगभग 4.99 लाख हेक्टेयर) का 0.21 प्रतिशत अतिक्रमित बताया गया था.
रेलवे प्रशासन के लिए यह सिर्फ जमीन की हानि नहीं, बल्कि ट्रेन संचालन, स्टेशन विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से बड़ी चिंता का विषय है. अतिक्रमण वाले इलाकों में अक्सर अनधिकृत निर्माण, अवैध बस्तियां और व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं, जो रेलवे परिचालन को जोखिम में डालती हैं.
रेलवे बोर्ड ने RTI में 25 साल का पूरा इतिहास देने के बजाय केवल पांच साल का डेटा साझा किया, जिससे स्थिति की गंभीरता और भी स्पष्ट होती है. सरकार और रेलवे प्रशासन से अब सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है, ताकि रेलवे की इस बहुमूल्य संपत्ति को अवैध कब्जों से मुक्त कराया जा सके और विकास कार्यों में तेजी लाई जा सके. यह खबर एक बार फिर याद दिलाती है कि सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा हर नागरिक की जिम्मेदारी है.