लखनऊ : उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को लखनऊ स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय में संगठन की बड़ी बैठक कर चुनावी तैयारियों का जायजा लिया. करीब दो घंटे चली मैराथन बैठक में प्रदेश के सभी 75 जिलों से आए जिलाध्यक्ष, मंडल कोऑर्डिनेटर, घोषित विधानसभा प्रभारी और 600 से अधिक वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए.
बैठक में मायावती ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को साफ संदेश दिया कि 2027 का चुनाव केवल बैठकों और कागजी तैयारियों से नहीं जीता जा सकता, इसके लिए पदाधिकारियों को सीधे जनता के बीच जाकर संगठन को मजबूत करने और बीएसपी के पुराने जनाधार को फिर से सक्रिय करने के निर्देश दिए गए.
मायावती ने कार्यकर्ताओं को 2007 से 2012 तक की बीएसपी सरकार के कामकाज को जनता तक पहुंचाने की रणनीति पर जोर दिया. उन्होंने खास तौर पर उस दौर के कानून-व्यवस्था मॉडल को प्रमुख मुद्दा बनाने के निर्देश दिए. कार्यकर्ताओं से कहा गया कि जनता को बताया जाए कि बीएसपी शासन में अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई थी.
इसके साथ ही तत्कालीन सरकार में लागू की गईं लोक- कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों को भी घर-घर तक पहुंचाने की तैयारी है. पार्टी का फोकस दलित, पिछड़े और मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने पर भी रहेगा.
बैठक की शुरुआत बीएसपी के दिवंगत विधायक उमाशंकर सिंह को श्रद्धांजलि देकर हुई. दो मिनट का मौन रखा गया. रसड़ा से बीएसपी के विधायक रहे उमाशंकर सिंह के निधन के बाद उनके बेटे युकेश सिंह (प्रिंस) पहली बार पार्टी की इतनी बड़ी बैठक में शामिल हुए.
युकेश की मौजूदगी को उनके संभावित राजनीतिक पदार्पण से जोड़कर देखा जा रहा है. मायावती पहले ही संकेत दे चुकी हैं कि यदि परिवार की इच्छा होगी तो युकेश सिंह को राजनीति में पूरा अवसर और सम्मान दिया जाएगा.
बैठक में मायावती के भतीजे और बीएसपी के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद मौजूद नहीं रहे. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक पूरी तरह उत्तर प्रदेश के संगठन और 75 जिलों की चुनावी तैयारियों पर केंद्रित थी. आकाश आनंद के 3 सितंबर को होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल होने की बात कही जा रही है.
मायावती ने संगठन को बूथ और विधानसभा स्तर तक सक्रिय करने, संभावित उम्मीदवारों की स्क्रूटनी तेज करने और सोशल इंजीनियरिंग को दोबारा मजबूत करने पर जोर दिया. अब देखना होगा कि 2027 के चुनाव में बीएसपी अपने पुराने सामाजिक समीकरण और 2007 के शासन मॉडल के सहारे कितनी मजबूत वापसी कर पाती है.