लखनऊ: मेरठ कलेक्ट्रेट परिसर में 8 जुलाई को बहुचर्चित ललिता गौतम हत्याकांड के विरोध में प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज और थप्पड़ कांड का मामला अब कानून के चौखट पर पहुँच गया है। इस घटना को लेकर अधिवक्ता अनिल प्रधान की ओर से मेरठ के विशेष एससी-एसटी (SC/ST) न्यायालय में एक याचिका दाखिल की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस अधिकारियों ने अनुसूचित जाति के प्रदर्शनकारियों के साथ अभद्रता की, मानवाधिकारों का हनन किया और बल प्रयोग कर भेदभावपूर्ण कार्रवाई की।
क्या है पूरा मामला?
मामला 8 जुलाई 2026 का है, जब ललिता गौतम हत्याकांड में आरोपियों की गिरफ्तारी और न्याय की मांग को लेकर दलित समाज और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि कलेक्ट्रेट पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने पहुँचे थे। इस दौरान कलेक्ट्रेट के बाहर सड़क जाम और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस हो गई।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया था। इसी दौरान मौके पर मौजूद एसएसपी अविनाश पांडे द्वारा प्रदर्शनकारी रवि गौतम को पुलिस वैन के अंदर थप्पड़ जड़ने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद काफी राजनीतिक व सामाजिक घमासान छिड़ गया था।
याचिका में पुलिस पर लगाए गए गंभीर आरोप
एससी-एसटी कोर्ट में दाखिल की गई अर्जी में पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं:
3 अगस्त को होगी महत्वपूर्ण सुनवाई
विशेष न्यायालय ने याचिका पर प्रारंभिक संज्ञान लेते हुए मामले की अगली सुनवाई की तारीख 3 अगस्त 2026 नियत की है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोर्ट इस मामले में पुलिस के खिलाफ जांच या प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश देती है, तो मेरठ पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।