पुरी जगन्नाथ मंदिर में चमत्कार: 10 दिन से कोमा में डूबे बेटे को गोद में लेकर पहुंचे पिता, पुजारी के छिड़काव से जिंदा हो उठा बच्चा

Amanat Ansari 20 Nov 2025 01:27: PM 2 Mins
पुरी जगन्नाथ मंदिर में चमत्कार: 10 दिन से कोमा में डूबे बेटे को गोद में लेकर पहुंचे पिता, पुजारी के छिड़काव से जिंदा हो उठा बच्चा

नई दिल्ली: भगवान जगन्नाथ के प्रसिद्ध धाम से एक ऐसी घटना सामने आई है, जो आस्था और चमत्कार की मिसाल बन गई. एक पिता की बिलखती हुई पुकार और उसके इकलौते बेटे की जान पर बनी भूखंडी हालत ने पूरे मंदिर परिसर को रुला दिया. डॉक्टरों ने हार मान ली थी, लेकिन पिता ने हार नहीं मानी. नंगे पैर, बेटे को सीने से लगाए, वह मंदिर पहुंचा और भगवान से गुहार लगाई. कुछ ही पलों में जो हुआ, वो चमत्कार ही था.

यह दिल दहला देने वाली कहानी इस हफ्ते के आगमन पर सोमवार को जगन्नाथ मंदिर के सिंहद्वार पर शुरू हुई. एक 40 वर्षीय व्यक्ति, जिसका नाम अभी गोपनीय रखा गया है, बाहों में शिथिल शरीर लिए बेटे को लादे मंदिर की ओर चला. बच्चा, जो मात्र 8-10 साल का था, 10 दिनों से गहरे कोमा में था. अस्पताल के आईसीयू से सीधे निकलकर पिता ने उसे घर ले जाने से इनकार कर दिया. डॉक्टरों ने साफ कह दिया था – "उसे मरा मान लो, अब कोई उम्मीद नहीं बची." लेकिन पिता का मन टूटा नहीं. वह सीधा पुरी धाम की ओर रवाना हो गया.

मंदिर के द्वार पर सुरक्षा गार्ड ने रोकने की कोशिश की, लेकिन पिता का करुण विलाप सुनकर सबकी आंखें नम हो गईं. "मेरा बेटा... भगवान, बचा लो!" ये चीखें गूंजने लगीं. गार्ड पीछे हट गए. पिता बच्चे को गोद में थामे, सीढ़ियां चढ़ते हुए गर्भगृह की ओर बढ़ा. भगवान जगन्नाथ की मूर्ति के सामने पहुंचकर वह घुटनों पर बैठ गया. बच्चे को जमीन पर लिटाकर हाथ जोड़ प्रार्थना करने लगा. आसपास के भक्त और मंदिर कर्मचारी चुपचाप खड़े हो गए. कईयों की आंखों से आंसू बहने लगे.

मंदिर के वरिष्ठ पुजारी, सेवायत सौम्य रंजन पांडा, उस दृश्य को देखकर दौड़े. उन्होंने बताया, "पिता का दर्द देखकर हमारा दिल पिघल गया. हमने उसे गर्भगृह के करीब आने दिया." पुजारी ने तुरंत भगवान का चरणामृत (पवित्र जल) लिया और बच्चे के माथे, सीने पर छिड़क दिया. साथ ही मंत्रोच्चार शुरू कर दिया. पिता बस सिर झुकाए, "हे जगन्नाथ, मेरे लाल को जगा दो" बार-बार पुकार रहा था.

फिर जो हुआ, वो अविश्वसनीय था. कुछ ही मिनटों में बच्चे का शरीर हिलने लगा. उसने धीरे-धीरे सिर घुमाया, आंखें खोलीं और कमजोर आवाज में "पापा" कहा. पिता उसे देखकर सन्न रह गया. बच्चा उठने की कोशिश करने लगा. मंदिर परिसर में सन्नाटा छा गया, फिर जयकारों की गूंज उठी. "जय जगन्नाथ! चमत्कार हो गया!" ये नारे गूंजने लगे. पुजारी और भक्तों ने तुरंत एम्बुलेंस बुलाई, लेकिन बच्चा खुद ही पिता की गोद में बैठ गया.

डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चे को अचानक ब्रेन हेमरेज हुआ था, जिससे कोमा में चला गया था. लेकिन मंदिर से लौटने के बाद जब उसे फिर से चेक किया गया, तो रिपोर्ट्स सामान्य आ रही हैं. पिता ने कहा, "मैंने भगवान पर भरोसा किया. वो मेरी सुन ली." यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जहां लोग इसे आस्था की जीत बता रहे हैं. मंदिर प्रशासन ने भी इसे भगवान जगन्नाथ की कृपा का प्रतीक बताया है.

ऐसी कहानियां हमें याद दिलाती हैं कि कभी-कभी चिकित्सा विज्ञान से परे भी कोई शक्ति काम करती है. पुरी धाम अब एक बार फिर चमत्कारों के लिए चर्चा में है.

Miracle Puri Jagannath Temple

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