भागवत-योगी की मुलाकात पर सबकी नजर, समझें सियासी मायने...

Global Bharat 14 Jun 2024 08:22: PM 2 Mins
भागवत-योगी की मुलाकात पर सबकी नजर, समझें सियासी मायने...

लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सीटें कम होने और हाल ही में RSS प्रमुख मोहन भागवत के राजनीतिक बयान के बाद एक और खबर निकलकर सामने आई है, जिसपर सबकी नजर है और वह खबर है मोहन भागवत और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की मुलाकात की. राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुलाकात के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ को कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है या फिर पूर्वांचल में कम हुई सीटों पर कोई बड़ा नर्णय लिया जा सकता है.

वहीं माना यह भी जा रहा है कि उत्तर प्रदेश (UP) में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव और संगठन विस्तार को लेकर RSS कुछ बड़ा एक्शन ले सकता है और चुनाव की कमान संभाल सकता है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस बार के चुनाव में RSS ने कम से कम 350 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है, जो बिना योगी आदित्यनाथ के पूरा नहीं हो सकता है, इसलिए यह बैठक RSS और BJP दोनों के लिए अहम है.

फिलहाल सियासी हवा ये कह रही है कि योगी को चारों तरफ से विरोधियों ने घेर लिया है. ऐसे में संघ का साथ आना और गोरखपुर मठ में योगी-भागवत का मुलाकात होना किसी बड़े लक्ष्य को दर्शाता है. आपको याद होगा कि जिस समय दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने सीएम योगी के विरोध में बयान दिया था, उस समय भी संघ खुलकर उनके साथ आ गया था.

वहीं अब मोहन भागवत और योगी की मुलाकात की तस्वीर शायद बीजेपी में कइयों को पसंद ना आए पर जो होने वाला है वो बहुत बड़ा ‘तूफान’ माना जा रहा है, क्योंकि UP में होने वाली मुलाकात की ख़बर ने ही अखिलेश यादव और राहुल गांधी की नींद उड़ा दी है.

वैसे हर दो साल में मोहन भागवत और योगी की मुलाकात मठ में होती रही है, लेकिन इस बार के मायने अलग है. साल 2022 का चुनाव जब योगी ने जीता था उस वक्त भी मोहन भागवत ने मुलाकात की थी  वो मुलाकात भी मठ में ही हुई थी. उसी मुलाकात के बाद योगी इतने रौद्र रूप में आ गए थे कि मई-जून की गर्मी में भी यूपी को शिमला बना डाला था.

माना जा रहा है कि योगी की मुलाकात से दो तरह के संदेश देने की कोशिश की गई है. क्योंकि बीजेपी के भीतर लखनऊ से लेकर दिल्ली तक एक लॉबी काम कर रही है. उस लॉबी का सीधा संदेश है कि योगी को नहीं छुना. दो साल पहले योगी को चारों तरफ से घेरा गया था, तब RSS ने अपना एक सिपाही (BL संतोष) भेजा था.

BL संतोष ने एक-एक नेताओं से बात की थी, तो कई नेताओं ने बंद लिफाफे में योगी की कई कमियां गिनाई थी, लेकिन सच्चाई नहीं सुनाई. हालांकि RSS ने योगी को उस वक्त भी सपोर्ट किया था और अभी भी संघ का हाथ योगी के सिर पर है. ऐसे में इस मुलाकात ने अभी यह जरूर स्पष्ट कर दिया है कि देश में अगले कुछ दिनों में जरूर कुछ बड़ा होने वाला है.  

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