उत्तराखंड के कोटद्वार की पहाड़ियों में जब 5 जून को सड़क किनारे एक लावारिस शव मिला, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह कहानी मुरादाबाद के एक घर की दीवारें हिला देगी। मृतक की पहचान दिल्ली के वसंत कुंज के रहने वाले रविंद्र कुमार के रूप में हुई। मामला जैसे-जैसे खुलता गया, वैसे-वैसे उसमें छुपे राज सामने आते गए। जिस पत्नी के साथ रविंद्र ने घर बसाया था, वही रीना सिंधु अब इस खौफनाक प्लान की मास्टरमाइंड निकली। कहानी की अहम किरदार तो रीना नाम की एक महिला ही थी। रीना जो मुरादाबाद में एक फिजियोथेरेपी सेंटर चलाती थी, अपनी शादीशुदा लाइव में मस्त जिंदगी बिता रही थी। तभी उसकी जदगी में दाखिल हुआ एक नया किरदार -परितोष।
कहने को तो वह सिर्फ एक पेशेंट था, लेकिन उसके इरादे इलाज से कहीं ज्यादा गहरे थे। फिजियोथेरेपी से शुरू हुआ ये रिश्ता धीरे-धीरे रीना की शादीशुदा जिंदगी में फरेब और फिर साजिश में बदल गया। एक फावड़ा बन गया रीना की मोहब्बत का हथियार। हत्या हुई बिजनौर के एक घर में, लेकिन लाश को ठिकाने लगाया गया उत्तराखंड की पहाड़ियों में।
रीना अपने पति की लाश के साथ कार में घंटों सफर करती रही। वह कैमरों से बच तो गई, लेकिन कानून से नहीं। पहले उन्होंने नोएडा में गाड़ी को छोड़ दिया और सोचा अब सब ठीक है। दोनों अलग-अलग रास्तों से भाग निकले। लेकिन हकीकत की परतें छुप नहीं सकीं, आखिर पुलिस ने भी कड़ी मेहनत के बाद 15 दिन में केस सुलझा लिया।
एक रियल लाइफ मर्डर मिस्ट्री, जिसमें पैसा, प्यार, धोखा और कत्ल सब शामिल हैं

जिस व्यक्ति ने दिल्ली की पुश्तैनी जमीन बेचकर मुरादाबाद में आलीशान मकान खड़ा किया, उसकी लाश पहाड़ों के सन्नाटे में मिली। उसकी उम्र 56 साल और रीना सिंधु करीब 36 की है। रीना सिंधु उसकी दूसरी पत्नी है। रिश्तों की शुरुआत हरिद्वार में हुई, जहां रविंद्र ने पहली शादी टूटने के बाद नई जिंदगी की तलाश में कदम रखा था। रीना से मुलाकात हुई, बात आगे बढ़ी और साल 2011 में दोनों ने सात फेरे ले लिए।
फिर रविंद्र ने दिल्ली का पुश्तैनी आशियाना बेचकर मुरादाबाद में तीन मंजिला कोठी बना ली, जिसकी कीमत करीब 3 करोड़ बताई जाती है। वहीं से शुरू हुई एक नई कहानी- रीना ने उसी घर में फिजियोथेरेपी सेंटर खोला और वहीं दाखिल हुआ परितोष। वह पेशेंट बनकर आया और इलाज के दौरान ही दिल दे बैठा। रीना और परितोष के बीच संबंध गहरे हुए और कुछ ही महीनों में उन्होंने रविंद्र को रास्ते से हटाने की योजना बना डाली।
हत्या को कैसे अंजाम दिया गया?

31 मई को रीना ने रविंद्र को बहाने से बिजनौर बुलाया और परितोष भी वहां मौजूद था। शराब दोस्ती के नाम, लेकिन यहां यह मौत का पैग साबित हुई। शराब के नशे में धुत रविंद्र पर परितोष ने फावड़े से ताबड़तोड़ हमला किया, गला और सीने पर भी वार किया। कत्ल के बाद शव को कार में बिजनौर से सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करके कोटद्वार लाया गया। इसके बाद दुगड्डा के जंगल में सड़क से नीचे फेंक दिया गया। इसके बाद नोएडा में गाड़ी छोड़ दी गई। दोनों आरोपी गायब हो गए, लेकिन मोबाइल सिग्नल, सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल्स की वजह से उन्हें पकड़ लिया गया।
मकान मेरा था… पर फैसले उसके- रीना ने बयान में क्या कहा?
रीना ने बताया कि रविंद्र उस घर को बेचना चाहता था। क्योंकि, उसकी पहली पत्ती से तलाक का मुद्दा सुलझा नहीं थी। वह कर्ज के बोझ और कोर्ट के फैसले में लगा भारी जुर्माना नहीं भर पा रहा था, इसलिए घर को बेचना चाहता था। लेकिन रीना इसके खिलाफ थी। घर बिकता तो सिर्फ संपत्ति नहीं जाती, उसके साथ-साथ उसका वजूद भी खत्म हो जाता। रविंद्र से इस मुद्दे पर अक्सर तनातनी होती, बहसें बढ़ती रहीं, और रिश्ता दिन-ब-दिन कमजोर होता गया। उसी वक्त उसकी जिंगदगी में परितोष पहले मरीज बनकर, फिर मन का मसीहा बनकर आया। उसके साथ सिर्फ भावनाएं नहीं बल्की एक अलग रिश्ता बन गया। रीना परितोष के साथ रहना चाहती थी और रविंद्र रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट बन चुका था। जब झगड़े, तकरार और बहसों से बात नहीं बनी, तो उन्होंने उसे मारने का प्लान बनाया।