भरतपुर: राजस्थान की एकमात्र महिला सांसद और कांग्रेस की युवा नेता संजना जाटव एक बार फिर अपनी बेबाकी के लिए चर्चा में आ गई हैं. कलेक्ट्रेट में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान उन्होंने जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) गौरव कपूर को मोबाइल फोन पर उलझे हुए पाया. बिना देर किए संजना ने उन्हें कड़ी नसीहत दे डाली और सख्त आवाज में कहा कि अगर बैठक में ध्यान देना ही नहीं है, तो बाहर चले जाओ.
यह घटना तब घटी जब हाल ही में एक बच्चे को अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी का सामना करना पड़ा था. संजना ने तुरंत इलाके के स्वास्थ्य अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन सीएमएचओ ने उनका फोन तक नहीं उठाया. यही पुरानी कड़वाहट मीटिंग में भड़क उठी. जब उन्होंने सीएमएचओ को फिर से फोन पर मग्न देखा, तो संजना का गुस्सा भड़क गया.
उन्होंने कहा, "मेरे निजी सहायक ने आपको फोन और मैसेज भेजे, अन्य अधिकारियों को भी कॉल की गई, लेकिन किसी ने कोई जवाब नहीं दिया. आपके पास आने वाले कॉल्स की तरह मेरे पास भी आते हैं, फिर भी मैं हमेशा रिस्पॉन्स देती हूं." बैठक में संजना ने साफ शब्दों में जोर देकर कहा कि वह अपने निजी कामों में उलझी नहीं हैं, बल्कि जनता द्वारा चुनी गई हैं और उसी जनता के हित में काम कर रही हैं.
उन्होंने सरकारी अस्पतालों की खराब स्थिति पर भी निशाना साधा. उनका कहना था कि अस्पतालों में सफाई का जिम्मा पूरी तरह ढीला पड़ा है, हर तरफ तंबाकू और गुटखे के खाली पैकेट बिखरे पड़े हैं, और मरीजों की परवाह करने वाला कोई नहीं दिखता. राजस्थान में कांग्रेस की इकलौती महिला सांसद संजना ने डॉक्टरों पर तंज कसते हुए कहा कि समाज उन्हें भगवान का दर्जा देता है, लोग अंतिम समय में उनकी आराधना करते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार ही नहीं.
वे खुद एयर कंडीशंड कमरों में आराम फरमाते हैं, जबकि बाहर मरीज बेचैन होकर तड़पते रहते हैं. संजना जाटव का यह साहसी रुख सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया है. नेटिजेंस उनकी स्टाइल की सराहना कर रहे हैं और मानते हैं कि भरतपुर की सांसद ने अधिकारियों को उनके कर्तव्य का आईना दिखा दिया है. यह वीडियो वायरल होते ही लोगों में उनकी कार्यशैली को लेकर उत्साह बढ़ गया है.