लखनऊ : उत्तर प्रदेश में मुख्तार अंसारी गैंग के खिलाफ कार्रवाई एक बार फिर तेज हो गई है. गाजीपुर जिले में गैंग से जुड़े लोगों पर पांच नए मुकदमे दर्ज किए गए हैं. इन मामलों में सांसद अफजाल अंसारी, उनके परिवार के कुछ सदस्य, गैंग के सहयोगी और तत्कालीन शस्त्र लिपिकों को नामजद किया गया है. आरोप है कि हथियार लाइसेंस जारी करने और उनके भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं.
जांच के दौरान सामने आया कि 43 लोगों के 80 से अधिक हथियारों का सत्यापन किया गया, लेकिन रिकॉर्ड में कई महत्वपूर्ण विसंगतियां मिलीं. कई हथियारों के सत्यापन संबंधी दस्तावेज अधूरे पाए गए, जबकि कुछ मामलों में मूल अभिलेख ही जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से गायब मिले. जांच एजेंसियों को आशंका है कि लाइसेंस प्रक्रिया और सत्यापन में नियमों का उल्लंघन कर अवैध तरीके से हथियारों को वैध दिखाने की कोशिश की गई.
मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने सभी पांच एफआईआर की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित कर दिया है. यह एसआईटी वाराणसी रेंज के डीआईजी की निगरानी में काम करेगी. टीम रिकॉर्ड की जांच, दस्तावेजों के मिलान और संबंधित अधिकारियों व लाभार्थियों से पूछताछ करेगी.
प्रशासन का कहना है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. लापरवाही या मिलीभगत सामने आने पर तत्कालीन शस्त्र लिपिकों और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में रहेगी.
मुख्तार अंसारी गैंग के आर्थिक नेटवर्क, अवैध गतिविधियों और उससे जुड़े मामलों पर पहले से चल रही कार्रवाई के बीच इन पांच नए मुकदमों को बेहद अहम माना जा रहा है. अब एसआईटी की जांच से यह साफ होगा कि हथियार लाइसेंस और सत्यापन प्रक्रिया में अनियमितताओं के पीछे किसकी क्या भूमिका रही और किन लोगों ने नियमों का उल्लंघन किया.