1999 में गोरखपुर में मुलाकात, योगी सांसद थे, IAS अधिकारी एक CDO, हुई ऐसी दोस्ती की आज बन गया परछाई.
मुलायम और मायावती का अधिकारी, योगी के लिए कर देता है दिन-रात एक, योगी ने क्यों बनाया जूनियर गृह मंत्री?
DM हो या SP हर किसी को देना होगा रिपोर्ट. प्रयागराज में योगी के साथ. 24 साल पुराने दोस्त पर फिर भरोसा.
ये कहानी एक IAS अधिकारी की है. 25 साल पहले एक अधिकारी की पोस्टिंग कल्याण सिंह की सरकार में गोरखपुर में होती है. कहते हैं कि उस वक्त योगी एकदम नए सांसद थे, और उनका विवाद हमेशा प्रशासन से होता था. वो मुसलमानों के लिए भी लड़ जाते थे. कहते हैं कि उसी दौरान कल्याण सिंह की सरकार ने CDO बनाकर संजय प्रसाद को भेजा. योगी एकदम यंग नेता थे, और संजय प्रसाद एकदम यंग IAS अधिकारी. गोरखपुर में ही दोनों की मुलाकात हुई. और अब दोनों एक दूसरे पर आंख बंद करके भरोसा करते हैं. संजय प्रसाद योगी को सर नहीं बल्कि महाराज जी कहकर बुलाते हैं. 1995 बैच के IAS अधिकारी संजय प्रसाद बिहार के सीतामढ़ी के हैं. वो कैसे योगी के ख़ास बने पहले ये समझाते हैं फिर आपको बताते हैं योगी ने क्या जिम्मेदारी दी है. कैसे पत्थरबाज़ों के होश उड़ गए हैं.

गोरखपुर में योगी का जलवा बढ़ रहा था. उस वक्त भी योगी जनता दरबार लगाते थे, उस दौरान जब समस्याएं आती. योगी जनता दरबार से सीधे सबसे ज्यादा DM और DCO को ही कॉल करते थे, CDO यानि मुख्य विकास अधिकारी. सरकार की योजनाओं का पूरा खाका इनके पास होता है. एक कहानी ये भी प्रचलित है कि उसी दौरान योगी ने इन्हें एक बार जनता दरबार में ही बुला लिया था. दो साल तक गोरखपुर रहने के बाद संजय प्रसाद का तबादला हो गया. हालांकि योगी जब 16 साल बाद CM बने तो उन्होंने अपने पुराने साथी को बुलाया. और अपनी सरकार में ताकतवर कुर्सी ऑफर कर दी. सीएम योगी ने अपने पास गृह मंत्रालय रखा है. ये सबसे ज़रूरी मंत्रालय होता है. जब योगी को गिरफ्तार किया गया था तब संजय प्रसाद लखीमपुर खीरी के डीएम थे. योगी की टीम में आज भी गोरखपुर की ताकत दिखती है.
फिलहाल इन्हें गृह मंत्रालय का प्रमुख सचिव बनाया गया है,यानि गृह मंत्रालय में सबसे अहम पद यही है.
योगी के नीचे का पद गृह मंत्रालय में संजय प्रसाद के पास है. DM-SP को विषम हालात में निर्देश दे सकेते हैं.
कहते हैं कि फिलहाल योगी ने अपनी टीम में अपने मन पसंद अधिकारियों को जिम्मेदारी दी है. मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह भी योगी के ख़ास माने जाते है. दुर्गाशंकर मिश्रा का कार्यकाल ख़त्म होते ही योगी ने इन्हें मुख्य सचिव बनाया. मनोज कुमार सिंह की मुलाकात भी योगी से तब हुई जब वो गोरखपुर के सांसद हुआ करते थे. यही नहीं योगी अपने हिसाब का आदमी ही पुलिस विभाग में ही चाहते हैं...इसलिए कैबिनेट में एक प्रस्ताव आया था..जिसमें DGP की कुर्सी तय करने का अधिकार योगी सरकार ने अपने पास रख लिया. इसके पहले तीन नाम UPSC के पास भेजे जाते थे, वहां से तय होता था कि कौन बनेगा DGP? पर अब ये कहानी भी UP में योगी ही तय करेंगे. प्रशांत कुमार के बाद भी जो DGP बनेगा वो योगी का ख़ास अधिकारी ही होगा.
सरकार अपने मन पसंद अधिकारियों को इसलिए बैठा रही है क्योंकि योगी का कार्यक्रम बढ़ रहा है. उनके ऊपर पार्टी की जिम्मेदारी बढ़ रही है. उन्हें दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक प्रचार में व्यस्त किया जा रहा है, इसलिए जब भरोसे के IAS उनका विभाग संभालेंगे तो योगी राहत की सांस ले सकते है.
संजय प्रसाद जैसे अधिकारी जो रात-दिन कर सकते हैं उनको जिम्मेदारी बताता है कि अब दिल्ली दरबार की ताकत लखनऊ में ख़त्म हो गई है. क्या होगा ? कैसे होगा? क्या करना है ? क्या नहीं करना है ? ये सबकुछ योगी को तय करना है? वो कहानी पुरानी हो गई कि दिल्ली का अधिकारी योगी की निगरानी के लिए बैठाया गया. दुर्गाशंकर मिश्रा जो चुनाव से पहले तक यूपी के मुख्य सचिव थे उन्हें दिल्ली का IAS कहा जाता था...योगी ने ये मिथक तोड़कर अपनी टीम बना ली है, इसका मतलब है कि वो किसी भी हाल में 2025 में कुछ तूफानी फैसला करने जा रहे है.