नई दिल्ली: बिहार सरकार ने हाल ही में मुंबई में एक भव्य बिहार भवन बनाने का फैसला लिया है. यह परियोजना दिल्ली में मौजूद बिहार भवन की तर्ज पर तैयार की गई है और इसका मकसद बिहार से मुंबई आने वाले लोगों, खासकर इलाज के लिए आने वाले मरीजों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराना है. यह इमारत मुंबई के एलफिंस्टन एस्टेट (मुंबई पोर्ट ट्रस्ट क्षेत्र) में बनाई जाएगी.
यह लगभग 30 मंजिला (बेसमेंट सहित) होगी, जिसकी ऊंचाई जमीन से करीब 69 मीटर होगी. कुल लागत 314.20 करोड़ रुपए है, जिसकी प्रशासनिक मंजूरी 13 जनवरी 2026 को बिहार कैबिनेट ने दी. भवन में आधुनिक डिजाइन के साथ 178 कमरे, वीआईपी सुइट्स, कार्यालय और कॉन्फ्रेंस हॉल जैसी सुविधाएं होंगी. खास बात यह है कि इसमें कैंसर जैसे गंभीर रोगों के इलाज के लिए मुंबई आने वाले बिहार के मरीजों और उनके परिजनों के लिए 240 बेड वाला डोरमेट्री (साझा आवास) का इंतजाम होगा.
साथ ही पर्यावरण के अनुकूल फीचर्स जैसे सोलर पैनल, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और हरा-भरा क्षेत्र भी शामिल किए जाएंगे. इस घोषणा के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने तीखा विरोध जताया है. हाल में हुए BMC चुनाव में जीते MNS के नवनिर्वाचित पार्षद यशवंत किल्लेदार ने साफ कहा है कि वे मुंबई की जमीन पर ऐसा कोई भवन नहीं बनने देंगे.
उनका तर्क है कि बिहार सरकार को यह पैसा अपने राज्य में अस्पताल और अन्य जरूरी सुविधाएं बढ़ाने पर खर्च करना चाहिए. मुंबई में पहले से ही स्थानीय लोगों के कई मुद्दे अनसुलझे हैं, महंगाई बढ़ रही है, ऐसे में बाहरी राज्यों के लिए अलग भवन बनाने की कोई जरूरत नहीं. MNS का यह रुख 'मराठी अस्मिता' और स्थानीय मुद्दों को लेकर उसकी पुरानी लाइन से मेल खाता है.
BMC चुनाव में पार्टी ने सीमित सफलता हासिल की थी, लेकिन इस मुद्दे पर उसने फिर से आक्रामक रुख अपनाया है. अब देखना यह है कि MNS के इस विरोध के बीच क्या यह परियोजना आगे बढ़ पाती है या कोई कानूनी/राजनीतिक अड़चन आती है. बिहार सरकार का कहना है कि यह कदम बिहारवासियों की भलाई और राज्य की प्रगति के लिए उठाया गया है.