Murliwale Hausla: कोबरा के दंश से मौत को मात देकर सर्पमित्र मुरलीवाले हौसला एक बार फिर से अपने सफर पर निकल पड़े हैं. जौनपुर के समोदपुर कलां गांव में इस बार मुरली ने नागिन का रेस्क्यू किया, जो अंडे देकर छिपी हुई थी, घर के बाहर लोगों की भीड़ जमा थी, जहां ईंट हटाकर मुरली ने पहले उसे देखा, फिर उसकी पूंछ पकड़कर न सिर्फ उसे काबू किया, बल्कि कई अंडे भी बरामद किए, बकायदा डिब्बे में उसे अंडों के साथ पैक किया, और डिब्बे में छेद किए, ताकि उन्हें ऑक्सीजन मिलता रहे.
दरअसल इससे पहले मुरली एक जगह कोबरा का रेस्क्यू करने पहुंचे थे, जहां उन्हें कोबरा ने डंस लिया था, जिसकी तस्वीरें सामने आई तो उनके फैंस में मायूसी छा गई थी, लेकिन अब मुरली फाउंडेशन नाम के पेज पर मुरली की चार तस्वीर सामने आई है, पहली तस्वीर में वो हाथ जोड़े नजर आ रहे हैं, तो दूसरी तस्वीर में बड़ी-बड़ी बिल्डिंग दिखाते दिख रहे हैं. तीसरी तस्वीर में कुर्सी पर बैठे थंबस अप करते नजर आ रहे हैं, तो वहीं चौथी तस्वीर में अपने हाथों में बंधी पट्टी को निहार रहे हैं, हाथों में पट्टी अब भी बंधी है, पर मुरली का कहना है अब वो बिल्कुल स्वस्थ हैं.
मीडिया रिपोर्ट बताती है मुरली के पास करीब 35-40 करोड़ की संपत्ति है, फाउंडेशन के जरिए वो वन्यजीवों को बचाने का काम कर रहे हैं, पूरे भारत में कहीं भी एक कॉल पर पहुंच जाते हैं, और किसी से कोई पैसा नहीं लेता. करीब एक साल पहले जब वो प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचे तो उन्होंने कहा था महाराज जी, हर साल सांप काटने से 50 हजार लोगों की मौत होती है, अंधविश्वास को दूर करने के लिए अपनी टीम के साथ लगा हूं. प्रेमानंद महाराज कहते हैं
“सबसे बड़ी धन्यवाद की बात ये है कि आप अपनी जान को संकट में डालकर विष वाले सांप को सुरक्षित करते हैं, बिना किसी पैसे के. सर्पमित्र का तात्पर्य यही है कि वो कोई भेंट नहीं लेते. आप जिनके घरों से पकड़ते हैं, उन्हें जंगल में छोड़ते हैं. घरवालों को भी सुरक्षित करते हैं. सांप में भी भगवान को देखें. घरवालों में भी देखें. इससे आपके भगवद्प्राप्ति का योग बन जाएगा. बस नाम जप करते रहिए.”
साथ ही प्रेमानंद महाराज ये भी कहते हैं पहले मंत्रों में बल था, उन्होंने मंत्रों की सिद्धि की थी. शास्त्रों में इस बात का प्रमाण मिलता है कि तक्षक नाग श्राप से प्रेरित होकर राजा परीक्षित को डंसा था, उनके बेटे जन्मेजय जी ने तब सर्पेष्टि यज्ञ करवाया और कहा सर्पों को दंड देंगे, क्योंकि उन्हें पता चला था कि एक सिद्धपुरुष जो उनके पिता को बचा सकते थे, उन्हें तक्षक ने रास्ते से ही लालच देकर लौटा दिया था, उस यज्ञ में जिस भी सर्प का नाम लिया जाता वो वहां आता, लेकिन जब काफी देर तक तक्षक नाग नहीं आया, तो
और अगले ही पल सिंहासन में लिपटा तक्षक वहां से आता है, पर रास्ते में एक ऋषि उसे रोक देते हैं और जन्मेजय जी तक्षक को बचाने का दान मांग लेते हैं. जो ये बताता है पहले मंत्रों में शक्ति थी, लेकिन अब वो मंत्रज्ञ नहीं हैं, झाड़-फूंक और अंधविश्वास से बचना चाहिए. मुरलीवाले हौसला को भी प्रेमानंद महाराज कहते हैं आपको भी यही सलाह सबको देनी चाहिए.