इन दिनों सवाल उठ रहा है कि क्या बीजेपी योगी को लेकर गंभीर नहीं है या जानबूझ कर योगी आदित्यनाथ को ऐसे मुकाम पर पहुंचाया जा रहा है, जहां से उन्हें वापस आने का रास्ता नहीं मिलेगा. बीजेपी में कौन है, जो मुस्लिम देशों का दबाव लेकर फैसले करता हैं? कहने का मतलब ये है कि क्या मुस्लिम देश चाहें तो वो योगी को दिल्ली आने से रोक सकते हैं.
दुनिया भर के राजनीतिक पंडित योगी को लेकर जो कहते हैं वो हैरान कर देने वाला है और योगी के समर्थकों को ये ख़बर ज़रूर सुननी चाहिए. इस बात को समझने के लिए आपको कुल 3 कहानी को समझना होगा. पहला दुनिया के ऐसे मुस्लिम देश जिनका भारत से संबंध अच्छा होना ज़रूरी है, तो क्या उन देशों का दबाव योगी को हटाने के लिए आ रहा है. दूसरा नुपूर शर्मा तो योगी की तरह हिन्दुत्व की लड़ाई लड़ती थी फिर उनको क्यों हटाया गया. तीसरा क्या मोदी सरकार के 5 ट्रिलियन के लक्ष्य में योगी एक कांटे की तरह है? जो अभी से चुभने लगे हैं?
बता दें कि नुपूर शर्मा को बीजेपी ने मुस्लिम देशों के इशारे पर हटाया था. ये दावा कोई हवा में नहीं बल्कि इसकी पूरी कहानी है. दरअसल, मिडिल ईस्ट के 12 मुस्लिम देश नुपूर के ख़िलाफ़ गुस्सा जता रहे थे. गल्फ कंट्री से भारत पंगा नहीं लेना चाहता है, क्योंकि अगर 5 ट्रिलियन इकोनॉमी की बात होती है तो गल्फ कंट्री से व्यापार किए बिना संभव नहीं हो सकता है. इसलिए बीजेपी ने ना सिर्फ नुपूर को हटाया बल्कि ये तक कहा था हम दुनिया के सभी धर्मों का सम्मान करते हैं और हम नुपूर शर्मा के बयान से नाता नहीं रखते हैं.
इन दिनों ख़बर ये चल रही है कि मुस्लिम देश योगी आदित्यनाथ के बयानों से नाराज़ हैं और हड़कंप मचा है कि वो मुसलमानों पर ऐसा क्यों बोल रहे हैं. चुनावी रैली में योगी का दावा है कि जो मुसलमान भारत के ख़िलाफ़ बोलेगा उसको पाकिस्तान में भेज देंगे. इस बयान के आधार पर बीजेपी को वोट तो मिल रहा है, लेकिन योगी को समझाने का दबाव भी मुस्लिम देशों का भारत पर पड़ सकता है, वो क्यों आपको समझाते हैं...
भारत में अभी राममंदिर बना है, योगी का भड़काऊ बयान दुनियाभर में वायरल है. ऐसा दावा किया जा रहा है कि अगर योगी की रफ्तार ऐसे ही रही तो फिर कुछ भी हो सकता है.क्योंकि जब नुपुर शर्मा को हटाया गया तो ये बात भारत में किसी को समझ नहीं आई कि ऐसी भी क्या वजह थी. भारत से नाराज़ चल रहा कतर मुसलमानों का नेता बनना चाहता है और वो योगी का विरोध शुरू कर सकता है. वो चाहेगा कि योगी आदित्यनाथ पर दबाव डालकर दुनिया भर के 190 करोड़ मुसलमानों का नेता बन जाए, तो क्या सिर्फ कतर ही है जो योगी के बयानों को पसंद नहीं कर रहा है या कोई और भी है.
इधर RSS बीजेपी पर दबाव डाल रहा है कि योगी आदित्यनाथ को दिल्ली लेकर आओ. उधर मुस्लिम देश योगी के लिए एक पंगा बन सकते हैं, जबकि भारत अपने व्यापारिक रिश्ते खराब नहीं करना चाहेगा तो केजरीवाल की बात को हम गंभीरत से नहीं लेते हैं. लेकिन अगर हालात बने तो फिर ऐसा हो सकता है. क्योंकि बाबा वैसे भी बीजेपी में कईयों के आंखों का कांटा बन चुके हैं और मौका मिलने पर बीजेपी उन्हें हटाने का मौका नहीं छोड़ेगी.
योगी आदित्यनाथ बोलते तो भारत में हैं लेकिन उसका असर अरब के देशों में होता है. तो एक बात समझ में नहीं आती जब पीएम मोदी खुद कहते हैं कि वो हिन्दू-मुस्लिम नहीं करना चाहते हैं तो फिर योगी आदित्यनाथ को मुसलमानों के ख़िलाफ़ क्यों बोलने को कहा गया है. जबकि मुसलमानों का हित तो योगी भी सोचते हैं. उनकी किसी भी योजना में हिंदू-मुसलमान की झलक नहीं दिखती, बल्कि सारी योजनाएं सभी धर्मों के लिए होती हैं. फिर सिर्फ बोलकर उन्हें कतर या फिर किसी मुस्लिम देश के रडार पर क्यों लाया जा रहा है?