कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक और बड़ा मोड़ आ गया है. उत्तर 24 परगना की आमडांगा विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के विधायक कासेम सिद्दीकी ने बागी गुट को छोड़कर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खेमे में वापसी का ऐलान कर दिया है.
घर वापसी के बाद भावुक होते हुए सिद्दीकी ने कहा, ''दीदी ही हमारे लिए सब कुछ हैं. उन्होंने ही हमें टिकट दिया और विधानसभा भेजा. हमने उनकी तस्वीर दिखाकर वोट मांगे और लोगों ने भी दीदी को देखकर ही हमें चुना. जब तक राजनीति में रहेंगे, दीदी के साथ ही रहेंगे.''
क्या था बागी गुट में जाने का मामला?
सिद्दीकी ने दावा किया कि उनके साथ धोखा हुआ था. उन्होंने बताया कि बागी गुट में शामिल होने के दौरान उन्हें यह समझाया गया था कि दस्तावेज पर हस्ताक्षर दीदी तक पहुंचेंगे और यह गुट भी ममता बनर्जी के नेतृत्व में ही काम करेगा. लेकिन जब वे वहां पहुंचे तो देखा कि कामकाज में ममता बनर्जी का नाम तक नहीं लिया जा रहा था. उन्होंने साफ कहा, ''हमें बताया गया था कि हम सब दीदी के साथ हैं. बाद में एहसास हुआ कि यह एक अलग गुट है.''
कौन हैं कासेम सिद्दीकी?
हुगली के फुरफुरा शरीफ दरगाह से जुड़े पीरजादा कासेम सिद्दीकी मुस्लिम समुदाय में काफी प्रभाव रखते हैं. पिछले साल ही वे तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए थे. पार्टी ने उन्हें राज्य महासचिव बनाया और आमडांगा से टिकट दिया, जहां से वे विधायक चुने गए.
विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी में भारी कलह मची हुई है. 50 से ज्यादा विधायक ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले बागी गुट में शामिल हो गए थे. ऐसे में सिद्दीकी की वापसी बागी खेमे के लिए झटका मानी जा रही है. इस बीच पार्टी के दोनों गुटों के बीच छात्र परिषद के स्थापना दिवस को लेकर भी विवाद जारी है और मामला हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है.