नई दिल्ली: महिला आरक्षण बिल लोकसभा में फेल होने के बाद एनडीए ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है. बता दें कि लोकसभा ने शुक्रवार को एक बिल को खारिज कर दिया, जिसमें महिलाओं के आरक्षण को तेजी से लागू करने और बिना नई जनगणना के ही परिसीमन (delimitation) करने का प्रावधान था. मत विभाजन के बाद प्रस्ताव को हराया गया. इसके पक्ष में 298 सदस्यों ने वोट किया, जबकि विरोध में 230 वोट पड़े. सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को बिल पास कराने के लिए 326 वोट चाहिए थे. कुल 489 सांसदों ने वोटिंग में हिस्सा लिया.
यह बिल महिलाओं के आरक्षण को लागू करने के लिए जरूरी नई जनगणना की शर्त को दरकिनार करने का प्रयास था. वोटिंग के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा से बिल वापस ले लिया. इसके बाद लोकसभा को कल सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दिया गया.
यह घटनाक्रम संसद की तीन दिवसीय विशेष बैठक (16 से 18 अप्रैल) के दौरान हुआ, जिसे "नारी शक्ति वंदन अधिनियम" यानी महिलाओं के आरक्षण कानून में संशोधन पर विचार करने के लिए बुलाया गया था. इस कानून में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है.
प्रस्तावित संशोधनों का मकसद था कि आरक्षण 2029 तक लागू किया जा सके. इसके साथ ही लोकसभा की कुल सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने का भी प्रस्ताव था, ताकि अगले आम चुनावों से पहले ही महिलाओं का आरक्षण लागू हो सके.
योजना के अनुसार, परिसीमन आखिरी प्रकाशित जनगणना के आधार पर किया जाना था, जिसका विपक्ष ने कड़ा विरोध किया है. कई विपक्षी दलों ने संसद में इन संशोधनों का विरोध किया और केंद्र सरकार से इन्हें वापस लेने की मांग की.