सिरमौर: हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के शिलाई गांव में दो भाइयों कपिल नेगी और प्रदीप नेगी की एक ही महिला सुनीता चौहान से शादी की खबर फिर से चर्चा में है. जुलाई 2025 में हुई इस शादी के लगभग 10 महीने बाद सुनीता ने एक बेटी को जन्म दिया है. सोशल मीडिया पर दोनों भाइयों को बधाइयों का सिलसिला जारी है. लेकिन कई लोग इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि परंपरा के मुताबिक दोनों भाई पति हैं, फिर बच्ची का असली जैविक पिता कौन है? बर्थ सर्टिफिकेट और अन्य सरकारी दस्तावेजों पर पिता का नाम किसका लिखा जाएगा?
इस मुद्दे पर News18 Hindi अपनी रिपोर्ट में लिखता है कि डॉ. सुनीता मित्तल ने बताया कि बच्चे के पिता का नाम दस्तावेजों में कैसे दर्ज होगा, यह मुख्य रूप से उस गांव और समुदाय की स्थानीय प्रथा पर निर्भर करेगा. पहले भी ऐसी शादियों में बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र पर पिता का नाम जिस तरीके से लिखा जाता रहा है, उसी के अनुसार ही यह तय होगा. हो सकता है कि परिवार में बड़े भाई का नाम ही पिता के रूप में दर्ज किया जाता हो, या फिर कोई और स्थानीय नियम हो.
मेडिकल साइंस क्या कहती है?
डॉ. सुनीता मित्तल के अनुसार, अगर जैविक पिता का पता लगाना हो तो डीएनए टेस्ट सबसे सटीक तरीका है. यह जांच तब की जाती है जब माता-पिता या बच्चा खुद इसकी मांग करते हैं. हालांकि इस खास मामले में दोनों पिता सगे भाई हैं, इसलिए उनका डीएनए भी काफी हद तक मिलता-जुलता होगा. फिर भी आधुनिक डीएनए टेस्ट में दोनों भाइयों के बीच सूक्ष्म अंतर को पहचाना जा सकता है क्योंकि हर व्यक्ति के 46 क्रोमोसोम में हजारों डीएनए स्ट्रैंड्स होते हैं.
ब्लड ग्रुप से भी कुछ अनुमान लगाया जा सकता है, लेकिन वह पूरी तरह विश्वसनीय नहीं होता. ब्लड ग्रुप माता-पिता के साथ-साथ चाचा-ताऊ आदि से भी मैच कर सकता है. डॉक्टर ने स्पष्ट किया कि जन्म के तुरंत बाद नवजात बच्चे का डीएनए टेस्ट आमतौर पर नहीं कराया जाता. 15 दिन या तीन हफ्ते तक रिजल्ट पूरी तरह सटीक नहीं आ सकता. बच्चा तीन महीने का होने के बाद यह जांच सुरक्षित और सटीक तरीके से की जा सकती है.
क्या है यह परंपरा?
कपिल और प्रदीप नेगी हाटी समुदाय की बहुपति (पॉलीएंड्री) प्रथा के तहत एक ही महिला सुनीता से शादी किए हुए हैं. इस परंपरा में एक महिला को परिवार के दो या अधिक भाइयों की साझा पत्नी माना जाता है. इस प्रथा को अपनाने का मुख्य कारण परिवार की जमीन-जायदाद को बंटने से बचाना, संयुक्त परिवार की एकता बनाए रखना और भाइयों के बीच प्रेम-विश्वास को मजबूत करना बताया जाता है. प्रदीप सरकारी नौकरी में हैं जबकि कपिल बहरीन में काम करते हैं. शादी के बाद कपिल वापस विदेश चले गए थे.