बिंदी-तिलक नहीं, लेकिन हिजाब की अनुमति? लेंसकार्ट ने ड्रेस कोड पर विवाद के बाद दी सफाई

Amanat Ansari 16 Apr 2026 12:34: PM 2 Mins
बिंदी-तिलक नहीं, लेकिन हिजाब की अनुमति? लेंसकार्ट ने ड्रेस कोड पर विवाद के बाद दी सफाई

नई दिल्ली: एक दस्तावेज, जिसे लेंसकार्ट के ऑफिस ड्रेस कोड संबंधी निर्देश बताया जा रहा था, सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया. इसमें बिंदी और तिलक को कार्यस्थल पर अनुमति नहीं दी गई थी, जबकि हिजाब को अनुमति दी गई थी. विवाद बढ़ने पर लेंसकार्ट के संस्थापक और सीईओ पेयुष बंसल ने स्पष्ट किया कि यह पॉलिसी दस्तावेज गलत है और कंपनी के वर्तमान दिशा-निर्देशों को नहीं दर्शाता. लेंसकार्ट आईवियर उद्योग की प्रमुख कंपनी है.

यह प्रतिस्पर्धी कीमतों पर चश्मा उपलब्ध कराती है क्योंकि यह खुद फ्रेम और लेंस बनाती है तथा मध्यस्थों को हटाकर लागत कम करती है. साल 2019 में यूनिकॉर्न बन चुकी इस स्टार्टअप को सूनीकॉर्न माना जाता है. कंपनी जल्द ही आईपीओ लाने की तैयारी में है और इसकी वैल्यूएशन लगभग 5.6 बिलियन डॉलर बताई जा रही है. लेंसकार्ट के वर्कप्लेस ड्रेस कोड का यह कथित दस्तावेज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शेयर किया गया, जिसने कंपनी के लिए भारी बैकलैश पैदा कर दिया.

दस्तावेज में सिंदूर के बारे में लिखा था, "अगर सिंदूर लगाया जा रहा है, तो इसे न्यूनतम मात्रा में लगाना चाहिए और यह माथे पर नहीं गिरना चाहिए." इसमें साफ लिखा था, "बिंदी की अनुमति नहीं है." हिजाब के बारे में दस्तावेज में अनुमति देते हुए यह भी बताया गया था कि मुस्लिम महिलाओं का हेडस्कार्फ कैसा होना चाहिए, "अगर हिजाब/टर्बन पहना जा रहा है, तो यह काला रंग का होना चाहिए. हिजाब मीडियम चेस्ट कवरेज वाला होना चाहिए और लोगो को ढकना नहीं चाहिए." "स्टोर में बुर्का पहनने की अनुमति नहीं है."

दस्तावेज में आगे लिखा था, "बिंदी/क्लचर की अनुमति नहीं है." धार्मिक धागों (कलावा) के बारे में, "धार्मिक धागे/रिस्टबैंड को उतारना जरूरी है." लेखिका और एक्टिविस्ट शेफाली वैद्य ने लेंसकार्ट के संस्थापक को टैग करते हुए X पर लिखा, "हाय पेयुष बंसल, कृपया स्पष्ट करें कि लेंसकार्ट में हिजाब तो ठीक है लेकिन बिंदी/कलावा क्यों नहीं?" हालांकि, पेयुष बंसल की प्रतिक्रिया से लगता है कि लेंसकार्ट के पास पहले ऐसा ग्रूमिंग गाइड जरूर था.

उन्होंने X पर सफाई देते हुए कहा, "मैं सीधे कहना चाहता हूं कि यह दस्तावेज हमारे वर्तमान दिशा-निर्देशों को नहीं दर्शाता... हमारी ग्रूमिंग पॉलिसी सालों में विकसित हुई है और पुरानी वर्जन आज हमारी पहचान को नहीं दिखाती. इस स्थिति से हुई भ्रम और चिंता के लिए हम माफी मांगते हैं." बंसल ने यह भी कहा कि लेंसकार्ट किसी भी प्रकार के धार्मिक अभिव्यक्ति पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाती, जिसमें बिंदी और तिलक भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि कंपनी अपने दिशा-निर्देशों की समीक्षा करती रहती है.

उन्होंने कहा कि हमारे भारत भर में हजारों टीम मेंबर्स हर रोज़ अपनी आस्था और संस्कृति को गर्व से पहनते हुए हमारे स्टोर्स में काम करते हैं. वे ही लेंसकार्ट हैं. यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब लेंसकार्ट आईपीओ के बाद अच्छी स्थिति में है. हाल ही में कंपनी के शेयर ₹547 तक पहुंच गए. दिसंबर तिमाही में लेंसकार्ट का मुनाफा पिछले साल की तुलना में लगभग 70 गुना बढ़ गया. शुद्ध लाभ ₹18.5 मिलियन से बढ़कर ₹1.31 बिलियन हो गया, जबकि राजस्व 38.8% बढ़कर ₹23.08 बिलियन पहुंच गया.

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