...ये है नेपाल के युवा प्रधानमंत्री बालेन शाह की नई कैबिनेट, जिसने 15 अप्रैल को ऐसा फैसला लिया कि नेपाल के भ्रष्ट नेताओं और अधिकारियों की नींद उड़ गई है... बैठक के बाद सरकार के प्रवक्ता और शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री सस्मित पोखरेल ने कहा कि 2006 से अब तक सभी अफसरों और नेताओं की संपत्ति की जांच की जाएगी. कैबिनेट ने 5 सदस्यों की ‘प्रॉपर्टी इन्वेस्टिगेशन कमीशन’ बनाने का फैसला लिया है, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज राजेन्द्र कुमार भंडारी करेंगे.
इसमें नेपाल के 7 पूर्व प्रधानमंत्रियों का भी नाम शामिल है, जिनमे से एक केपी शर्मा ओली को जेल भेजा गया, और वो जमानत पर बाहर हैं, जबकि शेर बहादुर देउबा को भी विदेश में गिरफ्तार करने की प्लानिंग चल रही है...ये सब बालेन शाह के उस चुनावी वादे का हिस्सा है, जिसमें उन्होंने कहा था हम नेपाल को भ्रष्टाचारमुक्त बनाएंगे...सिस्टम में पारदर्शिता तय करेंगे...और इसी के तहत सोशल मीडिया पर बालेन शाह के नाम से एक और मैसेज वायरल हो रहा है, जिसमें ये लिखा जा रहा है कि नेपाल सरकार ने सभी सरकारी अधिकारियों और नेताओं के बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाने का आदेश जारी किया है, जो ऐसा नहीं करेगा, उसकी कुर्सी जाएगी, उस पर एक्शन होगा...
ये दावा जैसे ही सोशल मीडिया पऱ आया, कई लोग इसे भारत में लागू करने की मांग करने लगे, लेकिन इस दावे की पड़ताल जब हमने की तो न तो नेपाल के प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर इसकी कोई जानकारी मिली और ना ही वहां के प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया हैंडल पर इसकी पुष्टि होती दिखी. बल्कि ये पता चला कि बालेन शाह वहां की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए 5वीं तक परीक्षा बंद करने और कोचिंग बंद करने समेत कई फैसले ले चुके हैं.
पऱ ऐसा फैसला अब तक नहीं हुआ...उनका फैसला शिक्षा माफियाओं पर शिकंजा कसने को लेकर है, ना कि प्राइवेट संस्थानों को बंद करने और किसी को सरकारी स्कूल में पढ़ाने का दबाव देने को लेकर...हालांकि हिंदुस्तान में भी इसकी मांग उठती रही है, और यहां तो कुछ दिन पहले अभी कुछ दिन पहले यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी चित्रकूट के डीएम की पुलकित गर्ग की प्रशंसा करते हुए कहा कि सभी शिक्षको को भी चाहिए कि वे अपने बच्चे को उसी स्कूल में दाखिला दिलवाएं जिसमें वो पढ़ाते हैं....दरअसल डीएम ने इपनी बच्ची का दाखिला आंगनबाड़ी के स्कूल में कराया है...
हालांकि कई लोग ये भी कहते हैं कि प्राइवेट स्कूलों से लेकर बड़े प्राइवेट संस्थानों तक में कई नेताओं का भी निवेश है, इसलिए ये नियम पूरी तरह लागू नहीं हो पाता...इसलिए अफवाह फैलाने से बचें...बालेन शाह नेपाल में बदलाव की नई मिसाल बन रहे हैं, ये बात सच है, लेकिन उनकी नीतियों पर भी अब कुछ लोग सवाल उठाने लगे हैं, और इस बार पहला सवाल उनकी विदेश नीति पर उठा है...क्योंकि बालेन शाह सरकार ने नेपाल को बफर स्टेट मान लिया है, बफर स्टेट का मतलब होता है दो दुश्मन देशों के बीच बसा छोटा सा देश....
जिसे लेकर वहां के पूर्व विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञवाली ने सोशल मीडिया पर लिखा कि नेपाल ने कभी अपनी भू-राजनीतिक स्थिति स्थिति को बफर स्टेट के रूप में नहीं बताया है और न ही उसके पड़ोसी मित्र राष्ट्रों ने ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल किया है, हमारे पड़ोसियों के बीच कोई अंतहीन दुश्मनी या संघर्ष नहीं है, जो ऐसे शब्द को प्रासंगिक बनाता हो.
हालांकि इस पर नेपाल सरकार ने अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, पर इतना जरूर है कि चीन से पहले बालेन शाह ने भारत को रखा है, वो सबसे पहले भारत दौरे पर आकर पुरानी परंपरा का पालन करेंगे...ताकि वहां की कम्युनिस्ट समर्थक ओली सरकार को ये बता पाएं कि भारत से संबंध बेहतर रखना उनकी सरकार की प्राथमिकता होगी..