वाशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका ने रूस और ईरान से तेल खरीदने की छूट को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला कर लिया है. मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई प्रभावित हुई थी. इस स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने कुछ समय के लिए प्रतिबंधों में ढील दी थी, जिससे भारत समेत कुछ देश रूसी और ईरानी तेल खरीद सकें. अब अमेरिकी सरकार ने साफ कर दिया है कि यह छूट समाप्त हो जाएगी और इसे बढ़ाया नहीं जाएगा.
अमेरिकी वित्त मंत्री ने क्या कहा?
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 15 अप्रैल को प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि हम रूसी तेल और ईरानी तेल पर लगे सामान्य लाइसेंस को रिन्यू नहीं करेंगे. यह सिर्फ 11 मार्च से पहले समुद्र में लदे हुए तेल के लिए था, जो अब इस्तेमाल हो चुका है या बिक चुका है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अस्थायी व्यवस्था पुराने स्टॉक को क्लियर करने के लिए थी, न कि रूस या ईरान को कोई नया फायदा पहुंचाने के लिए.
क्या थी यह छूट?
मार्च 2026 में अमेरिका ने भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने की 30 दिन की अस्थायी छूट दी थी. इसका मकसद वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई बनाए रखना और कीमतों को स्थिर रखना था. इसी तरह ईरानी तेल के लिए भी सीमित राहत दी गई थी. रूसी तेल वाली छूट 11 अप्रैल को खत्म हो चुकी है, जबकि ईरानी तेल वाली छूट 19 अप्रैल को समाप्त होने वाली है.
अब अमेरिका इन दोनों को बढ़ाने से मना कर चुका है. इस फैसले से भारत जैसे देशों को रूस और ईरान से आगे तेल खरीदने में दिक्कत हो सकती है, क्योंकि पुराने प्रतिबंध फिर से लागू हो जाएंगे. यह कदम अमेरिका की सख्त नीति का हिस्सा माना जा रहा है.