पटना: बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी क्या नीतीश कुमार का 10 साल पुराना शराबबंदी वाला फैसला पलटने वाले हैं, सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक में इसकी चर्चा तेज हो चली है, लोग ये अनुमान लगाने लगे हैं कि नीतीश के दिल्ली जाते ही सम्राट शराब पर बड़ा फैसला लेंगे, और पहले की तरह बिहार में ठेके खुल जाएंगे, अगर आप भी ऐसा सोच रहे हैं, तो ये पूरी तरह सही नहीं है, क्योंकि सम्राट चौधरी ने शपथग्रहण के 24 घंटे के भीतर ऐसा कोई इशारा न तो दिया है, और ना ही आगे देने वाले हैं, ऐसा उनके बयानों और फैसलों से लगता है...
उन्होंने शपथ लेने के बाद पहली ही बैठक में अधिकारियों को सिस्टम दुरुस्त करने के आदेश दिए, उसके बाद अगले दिन पटना गुरुद्वारा साहिब में मत्था टेंकने पहुंचते हैं, फिर सचिवालय में मीटिंग कर चार बड़े आदेश देते हैं.
यानि सम्राट चौधरी का टारगेट साफ है बिहार को हर मोर्चे पर विकसित बनाना है...और इसके लिए आर्थिक मजबूती की भी जरूरत होगी, ऐसे में अगर शराबबंदी वो खोलेंगे तो 28 से 30 हजार करोड़ के राजस्व का फायदा बिहार को मिल सकता है, प्रशांत किशोर ने बीते दिनों ये कहा भी था कि बिहार की खस्ता आर्थिक हालत का हवाला देते हुए शराबबंदी का फैसला वापस लिया जा सकता है...यहां तक कि बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने भी शराबबंदी हटाने की मांग की थी, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक माधव आनंद ने सम्राट चौधरी से मुलाकात कर बकायदा ये मांग उठाई कि शराबबंदी अब जरूरी नहीं है...लेकिन यहां चार ऐसे पेंच फंसे है, जिसकी वजह से शराबबंदी हटाने का फैसला इतना आसान नहीं माना जा रही है...
ऐसे में अगर सम्राट चौधरी फिलहाल शराबबंदी पर कोई फैसला लेंगे, इसकी उम्मीद नहीं दिखती. लेकिन जब भी ये करना होगा तो विधानसभा में बिल लाकर प्रस्ताव पास करवाना होगा...फिलहाल नीतीश कुमार भले ही दिल्ली की सियासत में सक्रिय हो रहे हैं, लेकिन नीतीश के बेटे निशांत ने अब जेडीयू को संभालने का प्लान बना लिया है, और इसी प्लानिंग के तहत उन्होंने डिप्टी सीएम की कुर्सी नहीं ली.
शपथ के करीब 24 घंटे बाद सम्राट चौधरी को बड़ा भाई बताते हुए बधाई दी और फिर ये कहा कि जेडीयू को मजबूत करने की कोशिश करूंगा. पिताजी के जो अधूरे सपने हैं उनको पूरा करने की कोशिश करूंगा. जनता का विश्वास-आशीर्वाद बना रहे.
यानि निशांत की प्लानिंग मौजूदा राजनीति में एंट्री लेकर पद लेने की नहीं बल्कि पहले पार्टी को मजबूत कर खुद की मजबूत छवि बनाने की है...यही वजह है कि सम्राट चौधरी भी फिलहाल कोई ऐसा फैसला नहीं लेने वाले जिससे गठबंधन के नेताओं को कोई परेशानी हो...