वो 7 नेता कौन, जो दूसरी पार्टी से बीजेपी में आकर बने ‘किंग’, नॉर्थ से नॉर्थ ईस्ट तक कमाल

Abhishek Chaturvedi 15 Apr 2026 10:22: PM 3 Mins
वो 7 नेता कौन, जो दूसरी पार्टी से बीजेपी में आकर बने ‘किंग’, नॉर्थ से नॉर्थ ईस्ट तक कमाल

पटना: आखिरकार बिहार में कुर्सी का खेल खत्म हुआ...नीतीश कुमार की जगह सम्राट चौधरी बीजेपी के कोटे से मुख्यमंत्री बने, जिन्हें राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई... जबकि जेडीयू कोटे से विजय चौधरी और विजेन्द्र यादव को डिप्टी सीएम बनाया गया है...विजय सिन्हा अब पूर्व डिप्टी सीएम हो चुके हैं..अभी मंत्रियों का शपथग्रहण होना बाकी है, लेकिन सवाल ये उठ रहा है कि सम्राट, विजय और बृजेन्द्र की तिकड़ी पर जेडीयू-बीजेपी ने भरोसा क्यों जताया, आखिर ये रणनीति क्या है...तो इसे समझने के लिए इनका बैकग्राउंड देखना होगा...

  • कोइरी जाति से आने वाले सम्राट चौधरी मोदी-शाह के भरोसेमंद माने जाते हैं
  • भूमिहार जाति से आने वाले विजय चौधरी नीतीश के भरोसेमंद कहे जाते हैं
  • जबकि बिजेन्द्र यादव की यादव वोटबैंक पर पकड़ अच्छी मानी जाती है

जिसका सीधा सा मतलब ये है कि बीजेपी ने नीतीश के लव-कुश समीकरण, लालू की यादवनीति और यूजीसी से हुए सवर्णों की नाराजगी के मुद्दे को एक साथ साधने की कोशिश की है..इसके अलावा बिहार की जनता जो नीतीशराज की तारीफ करती है, उसे वही सुकून दिलवाने के लिए सम्राट चौधरी ने कुर्सी संभालते ही काम शुरू कर दिया है...वो शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंचते हैं, जहां जरूरी फाइलों की समीक्षा करने के बाद मुख्य सचिव समेत अलग-अलग विभाग के सचिवों के साथ बैठक करते हैं. जिसे लेकर पत्रिका अपनी रिपोर्ट में दावा करता है कि सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को आदेश दिया कि लोगों को सरकारी ऑफिस के चक्कर बार-बार न काटने पड़ें ये तय करें. जनता की शिकायतों का निवारण तय समय सीमा के भीतर और पूरी पारदर्शिता के साथ हो, ये सुनिश्चित करें. सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों से संबंधित अटकी हुई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर प्रगति रिपोर्ट तुरंत सौंपे और लापरवाही के दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी, कानून व्यवस्था बनाए रखें, रोजगार पर काम करें.

सम्राट चौधरी की पहली मीटिंग ये बता रही है कि बिहार में कानून-व्यवस्था से लेकर रोजगार तक के क्षेत्र में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं...पर सम्राट के सामने चुनौती सिर्फ बिहार को आगे बढ़ाने की नहीं बल्कि चुनौती इस बात की भी है कि कैसे वो हाईकमान के भरोसे को सही साबित करते हैं, क्योंकि ये आरजेडी और जेडीयू से बीजेपी में आए, उसके बाद सत्ता के शिखर तक पहुंच गए, जबकि लंबे वक्त से बीजेपी से जुड़े नेता अपनी बारी का इंतजार करते रहे, हालांकि सम्राट ऐसे इकलौते नेता नहीं हैं, बल्कि बीजेपी ने ऐसे 7 उदाहरण पहले भी पेश किए हैं..

  • उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक पहले कांग्रेस में थे, फिर बसपा के ब्राह्मण चेहरा बने, 2017 में बीजेपी में शामिल हुए और डिप्टी सीएम बन गए.
  • झारखंड मुक्ति मोर्चा के बड़े नेता रहे अर्जुन मुंडा जब बीजेपी में आए तो वो वहां के सीएम भी बने, और बाद में उन्हें केन्द्रीय मंत्री तक की कुर्सी मिली
  • कर्नाटक में कुछ साल पहले येदियुरप्पा की जगह लेने वाले बसवराज बोम्मई पहले जनता दल और फिर जेडीयू में रहे, उसके बाद बीजेपी में आए थे.
  • त्रिपुरा में विप्लव देव को रिप्लेस करने वाले मणिक साहा पहले कांग्रेस में रहे, लेकिन बीजेपी में जैसे ही आए उन्हें सीएम तक की कुर्सी मिल गई
  • अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने भी अपनी सियासी पारी कांग्रेस से शुरू की थी, लेकिन बीजेपी में आए तो इन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिली
  • मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह का बैकग्राउंड न तो बीजेपी से रहा, और ना ही संघ से, वो अलग पार्टी से थे, बावजूद उसके बीजेपी ने उन्हें सीएम बनाया
  • असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा भी पहले कांग्रेस में हुआ करते थे, लेकिन जैसे ही बीजेपी में आए उनका कद बढ़ता चला गया.

यानि कांग्रेस समेत कई पार्टियों के नेता बीजेपी ज्वाइन करने के बाद बड़े पदों तक पहुंच गए..फिलहाल बिहार पर सबकी निगाहें टिकी हैं कि सम्राट चौधरी हाईकमान के भरोसे पर कितना खरा उतरते हैं...

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