...ये हैं इंदौर नगर निगम में कांग्रेस पार्षद रुबीना खान, जो निगम के बजट सत्रके दौरान इसी अप्रैल महीने में वंदे मातरम् पर भड़क जाती हैं, कहती हैं एक बाप की औलाद हो तो बुलवाकर दिखाओ... इनकी आपत्ति इस बात पर थी कि वंदे का मतलब होता है इबादत और मातरम का मतलब होता है मातृभूमि, हमलोग अल्लाह के सिवा किसी की इबादत नहीं कर सकते, इसलिए वंदे मातरम् नहीं गाऊंगी.
जिस पर सवाल उठता है तो ये कहती हैं कि कांग्रेस जाए भाड़ में, हमने कोई जीवनभर का कॉन्ट्रैक्ट नहीं किया है, निकालेंगे तो निकाल दें, निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत लूंगी. ओवैसी की पार्टी में चली जाऊंगी, हो सकता है निर्दलीय विधानसभा का चुनाव लड़ लूं. इन्हें लगा था ये बयान देकर ये मुस्लिमों की बड़ी नेता बन जाएंगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं, कांग्रेस ने भी इनसे किनारा करने की कोशिश कर ली, इन्हें पार्टी से निकाले जाने की चर्चा होने लगी, वंदे मातरम के अपमान का इन पर आरोप लगा, मुकदमा दर्ज हुआ, और पुलिस ने जब पांच घंटे तक इनसे पूछताछ की तो इनके तेवर बदल गए और कहने लगीं एक बाप के औलाद हो तो बुलवाकर दिखाओ वाले बयान पर माफी मांगती हूं, मैं राष्ट्रगीत का पहले भी सम्मान करती रही हूं और अब भी करती हूं. 15 साल से पार्षद हूं.
यानि कानूनी डंडे के डर से इनकी भाषा बदल गई, पर सवाल ये उठ रहा है कि क्या इस तरीके से कोई राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को लेकर सवाल उठा सकता है, योगी आदित्यनाथ तो साफ कहते हैं वंदे मातरम का जो विरोध करते हैं उन्हें धक्के मारकर बाहर कर देना चाहिए.
पर मोहन यादव का स्टाइल योगी आदित्यनाथ से अलग है, वो रुबीना खान के बयान को बेशर्मी भरा बताकर छोड़ देते हैं, उससे पहले रुबीना खान ने ये तक कहा था कि भारत से मुसलमान कही नहीं जाएंगे, वो आपकी ही छाती पर मूंग दलेंगे, जिसे लेकर भी खूब सवाल खड़े हुए थे...कईयों ने पूछा था रहना हिंदुस्तान में है, फिर पाकिस्तान की तरह वंदे मातरम का विरोध क्यों....क्यार राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान पर भी आस्था और विश्वास का नियम लागू होना चाहिए या फिर पूरे देश को एकसुर में ये कहना चाहिए हम पहले हिंदुस्तानी हैं, फिर हमारा धर्म है...
क्योंकि ये कहानी सिर्फ इंदौर में नहीं चल रही, बल्कि पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में तो मेयर फिरहाद हाकिम का एक वीडियो खूब वायरल हुआ था, जिसमें फिरहाद को ये कहते सुना गया कि इंशाल्लाह, बंगाल में एक दिन ऐसा आएगा जब आधी आबादी उर्दू बोलेगी. जिसका जवाब सीएम योगी आदित्यनाथ अपनी बंगाल रैली के दौरान अपने अंदाज में देते हैं और कहते हैं बंगाल में बांग्ला ही बोली जाएगी, जिन्हें ऊर्दू बोलना है वो वहां चले जाएं, जहां ऊर्दू बोली जाती है..