नई दिल्ली : नेपाल में बुधवार को आई प्रलयंकारी फ्लैश फ्लड ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के प्रमुख रास्ते को भी तबाह कर दिया. तिब्बत से निकलने वाली ल्हेंदे खोला और भोटेकोशी नदी के आसपास अचानक आई बाढ़ ने नेपाल-चीन सीमा के रसुवागढ़ी इलाके में भारी तबाही मचा दी. सड़कें,6 पुल, घर और जरूरी ढांचा पानी और मलबे में बह गया.
सबसे बड़ी चिंता उन श्रद्धालुओं को लेकर है जो कैलाश मानसरोवर के दर्शन के लिए नेपाल के रास्ते तिब्बत जा रहे थे. नेपाल टूरिज्म बोर्ड के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक 384 यात्री संपर्क से बाहर हैं, इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली बताए गए हैं. लापता विदेशी यात्रियों में 105 से ज्यादा भारतीय शामिल हैं. बड़ी संख्या में भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले श्रद्धालु बताए जा रहे हैं.
बाढ़ ने रसुवागढ़ी-केरुंग मार्ग को पूरी तरह बाधित कर दिया है. नेपाल और चीन को जोड़ने वाला मितेरी ब्रिज बह गया, जबकि सड़क और मोबाइल-फाइबर नेटवर्क भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. यही रास्ता निजी ऑपरेटरों के जरिए कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों के लिए सबसे लोकप्रिय और अपेक्षाकृत कम खर्चीला मार्ग है. अगले 48 से 72 घंटे तक इस रास्ते से यात्रियों की आवाजाही रोक दी गई है.
तबाही का मंजर इतना भयावह है कि कई जगह जहां कल तक गांव और सड़कें थीं, वहां अब सिर्फ मलबा दिखाई दे रहा है. नेपाल में मृतकों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है और सैकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं. राहत और बचाव अभियान मुश्किल हालात में जारी है.
भारत सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है. भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय लापता नागरिकों की जानकारी जुटा रहे हैं. हालांकि, भारत की आधिकारिक कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिपुलेख और नाथू ला मार्ग इस आपदा से प्रभावित नहीं हुए हैं. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि नेपाल के रास्ते कैलाश की ओर निकले सैकड़ों यात्रियों का सुरक्षित पता कब तक लगाया जा सकेगा.