काठमांडू: नेपाल ने इस सप्ताह आई विनाशकारी बाढ़ के बाद विदेशी सहायता के लिए दरवाजा तो खोला है, लेकिन साफ कहा है कि सामान्य सर्च-एंड-रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए बाहरी मदद की जरूरत नहीं है. काठमांडू उन क्षेत्रों में विशेषज्ञ सेवाएं और तकनीकी सहायता मांग रहा है, जहां उसके पास जरूरी उपकरण या अनुभव की कमी है.
विदेश मंत्री खनाल ने रॉयटर्स से कहा कि नेपाल को सामान्य खोज-बचाव काम के लिए विदेशी सहायता की आवश्यकता नहीं है, लेकिन विशेषज्ञ सेवाओं और तकनीकी सपोर्ट का अनुरोध किया गया है. सबसे बड़ी चिंता रसुवा और नुवाकोट के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे हो सकने वाले लोगों की है. नेपाल के पास टनल रेस्क्यू में सीमित अनुभव है और उसे विशेष उपकरण तथा तकनीकी ज्ञान की जरूरत है.
बुधवार को ग्लेशियर ढहने से हिमालयी नदी प्रणालियों में चट्टान, बर्फ, कीचड़ और मलबे का सैलाब आया, जो नेपाल-चीन सीमा के पास था. नेपाल और चीन के तिब्बत में 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,000 से अधिक लापता हैं. कई बस्तियां तबाह हो गईं, सड़कें, पुल, अस्पताल, स्कूल और हाइड्रोपावर सुविधाएं भारी क्षतिग्रस्त हुईं.
नेपाल शवों की पहचान और प्रबंधन में भी मदद मांग रहा है. कई पीड़ितों के शव नीचे की ओर बह गए हैं, जो चितवन और नवलपरासी (आपदा क्षेत्र से करीब 100 किमी दूर) से बरामद हो रहे हैं. अस्पताल शवों से भरे पड़े हैं और उन्हें रखने के लिए रेफ्रिजरेटर की कमी है. डीएनए टेस्टिंग और फोरेंसिक पहचान की क्षमता सीमित होने के कारण विदेशी विशेषज्ञों की मांग की गई है.
शुरुआत में कई देशों के सर्च-एंड-रेस्क्यू टीमों के प्रस्ताव ठुकराए गए थे, लेकिन आपदा बढ़ने और लापता नागरिकों वाले देशों के दबाव के बाद सीमित विशेषज्ञों को अनुमति दी गई. भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और बांग्लादेश ने मदद की पेशकश की थी.
भारत ने तेजी से जवाब दिया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा कि नेपाल के अनुरोध पर टनल रेस्क्यू टीम भेजने की तैयारी है. पहले एक रिकॉनेसेंस टीम भेजी जा रही है, जो मौके की स्थिति और जरूरी उपकरणों का आकलन करेगी. मेडिकल टीम भी भेजी जा रही है. बेली ब्रिज और तकनीकी टीमें भी उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि प्रभावित इलाकों में कनेक्टिविटी बहाल हो सके. एक बेली ब्रिज पहले से नेपाल में है.
भारत ने मानवीय सहायता का तीसरा खेप भी भेजा है, जिसमें पोर्टेबल जनरेटर, डिग्निटी किट, फूड पैकेट और जल शुद्धीकरण गोलियां शामिल हैं. उसी उड़ान में डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और टनल-रेस्क्यू विशेषज्ञों की 11 सदस्यीय टीम भी गई. 26 अगस्त से अब तक भारत ने नेपाल को कुल 57.5 टन राहत सामग्री भेज दी है.