मेरठ : उत्तर प्रदेश के मेरठ के हस्तिनापुर के चर्चित भीकुंड-इकवारा कांड से जुड़े श्रीराम जाटव की करीब 30 साल बाद आगरा सेंट्रल जेल से रिहाई हुई. जेल से बाहर आते ही समर्थकों ने उसका फूल-मालाओं से जोरदार स्वागत किया. इसके बाद आगरा से मेरठ तक जुलूस निकाला गया। इस दौरान भारत सरकार लिखी गाड़ी भी जुलूस में दिखाई दी. रिहाई और स्वागत का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है. रिपोर्टों के मुताबिक, श्रीराम जाटव ने अपनी उम्रकैद की सजा पूरी करने के बाद जेल से बाहर कदम रखा है.
इस पूरे मामले की कहानी 1997 के हस्तिनापुर के गंगा खादर इलाके से जुड़ी है. उस समय क्षेत्र में श्रीराम जाटव गिरोह और किरोड़ी गुर्जर गिरोह के बीच वर्चस्व को लेकर लंबे समय से तनाव चल रहा था. इसी गैंगवार ने बाद में भीकुंड-इकवारा नरसंहार का रूप ले लिया.
इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, 16-17 जनवरी 1997 की रात हथियारबंद लोग भीकुंड गांव पहुंचे. अभियोजन के अनुसार, श्रीराम और उसके साथियों ने घर में सो रहे लोगों पर फायरिंग की. इस हमले में नरेंद्र, मौली और संजय की मौत हुई, जबकि रोहताश और बालेश्वर घायल हुए. इसके अलावा करतार सिंह, बाबू और सुभाष की हत्या का भी मुकदमे में उल्लेख है.
अदालत के रिकॉर्ड में इस हमले को पहले हुए ‘इकवारा कांड’ का बदला बताए जाने का भी उल्लेख है. मामले में श्रीराम समेत कई आरोपियों के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था. निचली अदालत ने श्रीराम को उम्रकैद की सजा सुनाई, जिसे हाईकोर्ट के स्तर पर भी बरकरार रखा गया. अब तीन दशक बाद उसकी रिहाई ने पुराने गैंगवार और उस दौर की हिंसा को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है.