लखनऊ : उत्तर प्रदेश की सियासत में एक दौर ऐसा भी था, जब अपराध और राजनीति का गठजोड़ सत्ता के गलियारों तक चर्चा का विषय बना रहता था. पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी यूपी तक कई ऐसे नाम थे, जिनके प्रभाव की चर्चा पुलिस रिकॉर्ड से लेकर चुनावी मैदान तक होती थी, लेकिन 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद सरकार ने कानून-व्यवस्था को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल किया और इसके बाद यूपी के अपराध जगत की तस्वीर तेजी से बदलती दिखाई दी.
मुन्ना बजरंगी, मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद जैसे चर्चित माफिया चेहरों का दौर अब इतिहास का हिस्सा बन चुका है. मुन्ना बजरंगी की 2018 में बागपत जेल में हत्या कर दी गई. इसके बाद मुख्तार अंसारी लंबे समय तक जेल में रहा और 2024 में बांदा मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. वहीं, प्रयागराज के चर्चित माफिया-राजनेता अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की 2023 में पुलिस सुरक्षा के बीच प्रयागराज में गोली मारकर हत्या कर दी गई.
इन घटनाओं को केवल अलग-अलग आपराधिक घटनाओं के तौर पर देखना तस्वीर का एक हिस्सा है. योगी सरकार के दौरान पुलिस की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति, गैंगस्टर एक्ट, संपत्तियों पर कार्रवाई और अवैध कब्जों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई ने अपराध की अर्थव्यवस्था पर भी प्रहार किया. सरकार का दावा रहा है कि माफिया और उनके नेटवर्क की अवैध संपत्तियों को जब्त और ध्वस्त करके उनके आर्थिक साम्राज्य को कमजोर किया गया.
पश्चिमी यूपी में कुख्यात अपराधी अनिल दुजाना भी लंबे समय तक पुलिस के निशाने पर रहा. 2023 में एसटीएफ के साथ मुठभेड़ में उसकी मौत हुई. इसी तरह कुख्यात अपराधी विकास दुबे के बिकरू कांड ने पूरे देश को हिला दिया था. 2020 में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद फरार विकास दुबे को उज्जैन से गिरफ्तार किया गया और कानपुर लाते समय पुलिस के मुताबिक वाहन पलटने के बाद हुई मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई.
इन कार्रवाइयों के साथ एक और बड़ा बदलाव दिखाई दिया कि अपराधियों के राजनीतिक संरक्षण को लेकर सरकार का सख्त संदेश. योगी आदित्यनाथ लगातार मंचों से कहते रहे कि यूपी में कानून से ऊपर कोई नहीं है. सरकार समर्थकों के लिए यह माफिया के अंत की कहानी है, जबकि विपक्ष कई बार पुलिस कार्रवाई और एनकाउंटर की प्रक्रिया पर सवाल उठाता रहा है.
फिर भी एक बात साफ है कि 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में माफिया और अपराध की राजनीति को लेकर सरकारी भाषा, पुलिस की रणनीति और प्रशासनिक कार्रवाई का तरीका पहले से काफी अलग दिखाई दिया. कभी जिन नामों से इलाके की सियासत कांपती थी, उनमें से कई अब सिर्फ पुराने आपराधिक अध्यायों और केस फाइलों में दिखाई देते हैं.
यूपी की राजनीति में इसे योगी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनाया जाता है माफिया का दबदबा खत्म, कानून का इकबाल कायम, लेकिन इस मॉडल की असली परीक्षा यही है कि सख्ती के साथ कानून की प्रक्रिया और न्यायिक जवाबदेही भी उतनी ही मजबूत बनी रहे.