भोपाल : मंदसौर के स्वास्थ्य विभाग में कथित आउटसोर्स भर्ती घोटाले ने सरकारी नौकरी की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मामला इतना बड़ा है कि स्वीकृत पदों और वास्तविक नियुक्तियों के बीच भारी अंतर सामने आने का आरोप है. उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, मंदसौर के CMHO कार्यालय में सरकार की ओर से स्वीकृत 66 पदों के मुकाबले 318 लोगों को नियुक्ति देने का मामला सामने आया है. यानी निर्धारित संख्या से कई गुना अधिक लोगों को नौकरी देने की प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं.
आरोप है कि इनमें कई नियुक्तियां अधिकृत प्रक्रिया के बजाय आउटसोर्स कंपनियों के लेटरहेड पर कर दी गईं. सबसे गंभीर आरोप CMHO के रिश्तेदार जगदीप को लेकर हैं. शिकायत के मुताबिक, जगदीप ने CMHO कार्यालय के आसपास से कथित तौर पर भर्ती का नेटवर्क चलाया और उम्मीदवारों से प्रति व्यक्ति करीब 70 हजार रुपये लिए गए. हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी.
मामला तब खुलकर सामने आया जब नियुक्ति पाने वाले कई कर्मचारियों को जॉइनिंग के बाद भी वेतन नहीं मिला, इसके बाद नियुक्तियों की संख्या, प्रक्रिया और वैधता को लेकर सवाल उठे और जांच शुरू हुई. रिपोर्ट के अनुसार, मंदसौर के CMHO को निलंबित कर दिया गया है और जगदीप समेत कुल पांच लोगों के खिलाफ जांच चल रही है.
इस पूरे प्रकरण का सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर स्वीकृत पद 66 थे, तो 318 लोगों की नियुक्ति किस आधार पर हुई. किस स्तर पर दस्तावेजों की जांच नहीं हुई और इतनी बड़ी संख्या में नियुक्तियां सिस्टम की नजर से कैसे निकल गईं. अब जांच में यह तय होना बाकी है कि इसमें किसकी क्या भूमिका थी, पैसा किस तक पहुंचा और कितनी नियुक्तियां नियमों के मुताबिक थीं.