बरेली : उत्तर प्रदेश पुलिस में इन दिनों अनुराग आर्य का नाम खूब चर्चा है. बरेली में हिंसा के बाद उनका घुड़सवारी करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है. वायरल वीडियो में वे घोड़े की लगाम थामे हुए आत्मविश्वास से भरे नजर आते हैं, लेकिन यह सिर्फ एक विडियो ही नहीं, बल्कि उनकी शख्सियत की झलक है. अनुराग आर्यअपनी काबिलियत, अपनी दमदार मौजूदगी और निर्णायक नेतृत्व से भी पहचाने जाते हैं.
बरेली के एसएसपी अनुराग आर्य का जन्म 10 दिसंबर 1987 को उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के छपरौली गांव में हुआ है. उनका परिवार डॉक्टरों का था. पिता अनिल आर्य जनरल फिजिशियन थे. वहीं, मां सरिता आर्य स्त्री रोग विशेषज्ञ थी. बचपन से ही घर का माहौल पढ़ाई-लिखाई और सेवा से भरा था, लेकिन गांव के स्कूल से शिक्षा लेने वाले अनुराग को अक्सर अंग्रेज़ी भाषा की कमी काफी खलती थी. शहरों के बच्चों के सामने वे खुद को पीछे महसूस करते थे, मगर इसी कमी ने अनुराग आर्य ने अपनी मजबूत बनाया. उन्होंने ठान लिया कि इस चुनौती को पार करके आगे बढ़ना है.
सैन्य अकादमी ने बदला व्यक्तित्व
साल 2008 में अनुराग का चयन भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) देहरादून उत्तराखंड में हुआ. यहीं से उनका व्यक्तित्व में बदलाव शुरू हुआ और पीछे मुड़कर नहीं देखें. अकादमी की सख्त ट्रेनिंग ने उनके अंदर अनुशासन, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को विकसित किया. यहां पर उन्होंने घुड़सवारी, राफ्टिंग और अन्य साहसिक खेलों में भी भाग लिया. यहीं से उन्होंने हर परिस्थितियों से निपटने का साहस दिया.
सिविल सेवा की ओर कदम
सैन्य अकादमी के बाद उन्होंने सिविल सेवा को लेकर तैयारी शुरू की. गांव के लड़के से लेकर यूपीएससी (UPSC) तक का सफर आसान नहीं था,।लेकिन अनुशासन और मेहनत ने रंग दिखाया और अनुराग आर्य 2013 बैच के आईपीएस अधिकारी बने. यह उपलब्धि उनके परिवार और गांव दोनों के लिए गर्व का क्षण था.
दंगाइयों के लिए काल
पुलिस सेवा में आने के बाद अनुराग आर्य ने आजमगढ़ सहित कई जिलों में काम किया और हर जगह अपनी अलग पहचान बनाई. वे अपने सख्त लेकिन न्यायपूर्ण रवैये के लिए कुछ आईपीएस अफसरों में जाने जाते हैं. हाल ही में बरेली में हुई सांप्रदायिक तनाव की घटना में उन्होंने पुलिस बल के साथ मोर्चा संभाला. नमाज के बाद बैनर लगाने को लेकर दो पक्षों में विवाद भड़क गया था, जो पथराव और हिंसक झड़पों में बदल गया. मौके पर हालात बिगड़ते देख उन्होंने लाठीचार्ज का आदेश दिया और भीड़ को तितर-बितर कर स्थिति को नियंत्रण में लिया था.