NIA Raid in Bihar: बिहार के 4 जगहों पर एक साथ रेड पड़ती है, पहली रेड होती है आरा जिले में जबकि दूसरी वहां से कई किलोमीटर भागलपुर जिले में. दिल्ली से गई एनआईए की टीम रात में पटना रुकती है, फिर सुबह-सुबह आरा और भागलपुर के भीखनपुर जगह पर पहुंचती है. जहां मस्जिद के आस-पास के इलाकों में खलबली मच जाती है. इलाका ऐसा कि पुलिस की तीन गाड़ियां अधिकारियों के साथ गई थी, ताकि कोई पत्थर न फेंके. उत्तर प्रदेश के झांसी की तरह अधिकारियों की पकड़ से कोई मौलाना को छुड़ाने की कोशिश न करे, इसके लिए स्पेशल इंतजाम किए गए थे.
क्योंकि पुलिस को इंफॉर्मेशन मिली थी कि यहां कुछ भयंकर खेल चल रहा है, और ये खेल एक तरीके से कहें तो जान लेने से भी बड़ा था, नजरे सद्दाम और उसके साथी हिंदुस्तान को अलग तरीके से हिलाने की साजिश में लगे थे, घर का कोना-कोना खंगालने पर लाखों रुपए के नोट मिलते हैं, ये पैसे सैलरी के होंगे इस बात का शक पैदा होता है, और तलाशी तेज होते ही कुछ ऐसे दस्तावेज मिलते हैं, जिसमें लिखी बातें एनआईए के अधिकारियों को भी हिलाकर रख देती है. बड़ी मस्जिद लेन वाले घर पर नजरे सद्दाम के पिता मुहम्मद मसिउज्जमा से अधिकारी पूछताछ करते हैं, परिवार के अलग-अलग लोगों से अलग-अलग कमरे में पूछताछ होती है, जिसके बाद पता चलता है नजरे सद्दाम का देश के दुश्मनों से गहरी दोस्ती थी.
ये कहानी का पहला हिस्सा था, जिसके कश्मीर कनेक्शन ने कई तरीके के सवाल खड़े किए, अब दूसरा हिस्सा सुनिए, जो नेपाल कनेक्शन के रूप में खुला है. जांच में पता चला नजरे सद्दाम की मुलाकात नेपाल के भोरे गांव में संतोष नाम के व्यक्ति से होती थी, वहां उसे दो पाकिस्तानी एजेंट मिलते थे, और उनके जरिए वो जाली नोट वहां से लेता, बिहार में घुसता, वहां से सीक्रेट रास्ते से देश के अलग-अलग राज्यों में जाता, इन नोटों का इस्तेमाल कश्मीर की अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने और घाटी में उग्रवाद को बढ़ावा देने के लिए किया जाता.
यहां कहानी खत्म नहीं होती, बल्कि नया अध्याय शुरू होता है. मीडिया रिपोर्ट बताती है. 5 सितंबर 2024 को मोतिहारी एसपी कांतेश कुमार मिश्रा की निगरानी में जाली नोट के साथ मोतिहारी पुलिस ने तीन तस्करों को पकड़ा था. जिसमें पहला था भागलपुर का नजरे सद्दाम, दूसरा था भोजपुर का मोहम्मद वारिस और तीसरा था मोहम्मद जाकिर हुसैन... तस्करों के पास से 500 रुपए के 1 लाख 95 हजार के जाली नोट मिले थे. इसकी निशानदेही पर ही अनंतनाग से सरफराज पकड़ा गया.
जिसके बाद अब इस केस में एनआईए ने तीनों के घरों पर एक साथ रेड की, ख़बर यहां तक है कि सरफराज के संबंध जम्मू-कश्मीर के कुछ नेताओं से भी हो सकते हैं, जिसकी जांच में एनआईए की टीम जुटी है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि वो नेता कौन हैं, जो खाते देश की हैं, पर गाते पाकिस्तान की हैं. बिहार के कुछ जिलों में लंबे वक्त से ऐसी हरकतों पर अधिकारी नजर बनाए हुए हैं, हैरानी की बात ये है कि कुछ महीने पहले गिरफ्तार हुआ मो. वारिस शिक्षक अख्तर हुसैन का बेटा है और बेऊर जेल में अभी बंद है. वो सीतामढ़ी के पुपुरा में एक पॉलटेक्निक कॉलेज में इंजीनियरिंग का छात्र था. सितंबर 2024 में उसे भारी मात्रा में जाली नोटों के साथ गिरफ्तार किया गया था. जो ये बताता है कि ये काला कारोबार कितना बड़ा और गंभीर है.
साल 2024 की वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है,पिछले पांच वर्षों में 500 रुपए के नकली नोटों में 317 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इस बात से आप अंदाजा लगा सकते हैं, कैसे अर्थव्यवस्था हिलाने की साजिश रची जा रही है, हमें उन अधिकारियों को सैल्यूट करना चाहिए जो इस खेल के हर खिलाड़ी को न सिर्फ सलाखों के पीछे पहुंचा रहे हैं, बल्कि हर अपने तरीके से राज उगलवा रहे हैं.