नई दिल्ली: ओडिशा देश का पहला राज्य बनने जा रहा है जो पूरी तरह माओवाद-मुक्त हो जाएगा. राज्य में अब सिर्फ 15 नक्सलवादी बचे हैं. राज्य सरकार ने इन आखिरी बचे माओवादियों को 31 मार्च 2026 तक पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा है. ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 23 मार्च 2026 को विधानसभा में यह जानकारी दी.
उन्होंने बताया कि 15 मार्च 2026 तक राज्य में 96 माओवादी और उनके सहयोगी आत्मसमर्पण कर चुके हैं. यह सब सुरक्षा बलों के लगातार दबाव और चल रहे अभियानों का नतीजा है. सीएम माझी ने कहा कि 31 मार्च की समयसीमा बहुत करीब है और सरकार को पूरा भरोसा है कि ओडिशा को माओवादी प्रभाव से पूरी तरह मुक्त कर लिया जाएगा.
प्रभावित इलाकों में स्थायी शांति कायम करने के लिए पुलिस लगातार अभियान चला रही है और आत्मसमर्पण करने वालों को पुनर्वास की सुविधाएं भी दी जा रही हैं. मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि केंद्र सरकार की SRE योजना के तहत वर्तमान में केवल कंधमाल जिला माओवादी प्रभावित जिला माना जा रहा है. इसके अलावा 8 अन्य जिलों बौध, बलांगीर, कालाहांडी, कोरापुट, मल्कानगिरी, नवरंगपुर, नुआपाड़ा और रायगढ़ा को लिगेसी एवं थ्रस्ट (L&T) जिलों की श्रेणी में रखा गया है.
हालांकि वास्तविक स्थिति यह है कि सिर्फ कंधमाल, कालाहांडी और रायगढ़ा जिलों के जंगली सीमावर्ती इलाकों में करीब 15 माओवादी ही सक्रिय बचे हैं. राज्य के बाकी किसी भी हिस्से में उनकी मौजूदगी नहीं है. गौरतलब है कि 23 फरवरी को सीएम ने सदन में बताया था कि राज्य में करीब 40 सक्रिय माओवादी हैं. यानी पिछले एक महीने में भी उनकी संख्या काफी कम हो गई है.
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को मुख्यधारा में लाने के लिए ओडिशा सरकार की ‘आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति’ के तहत कई सुविधाएं दी जा रही हैं, जैसे आर्थिक मदद, घर, 36 महीने तक मासिक भत्ता, नौकरी का प्रशिक्षण, शादी में सहायता, स्वास्थ्य कार्ड और राशन कार्ड. सुरक्षा बलों का अभियान पूरे जोर पर है.
केंद्रीय बलों की 71 कंपनियां, 44 स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप टीमें, 839 जिला वॉलंटियर फोर्स के जवान, इंडिया रिजर्व बटालियन की 49 प्लाटून, स्पेशल सिक्योरिटी बटालियन की 29 प्लाटून और ओडिशा स्पेशल स्ट्राइकिंग फोर्स की 92 से ज्यादा प्लाटून इन इलाकों में तैनात हैं. इनके अलावा ड्रोन, आधुनिक हथियार, इंटरसेप्टर और बेहतर संचार उपकरणों का इस्तेमाल करते हुए लगातार सर्च और एरिया डोमिनेशन ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं. माओवादियों की सप्लाई लाइन काटने और विकास कार्य तेज करने की रणनीति भी बनाई गई है.
पड़ोसी राज्यों छत्तीसगढ़ और झारखंड की सीमाओं पर भी खास निगरानी रखी जा रही है ताकि कोई घुसपैठ न हो सके.
ओडिशा पुलिस के महानिदेशक वाईबी खुरानिया ने कहा, “22 मार्च को कंधमाल में माओवादियों का बड़ा हथियारों का जखीरा बरामद हुआ है. हमारा अभियान लगातार जारी है. हमें पूरा विश्वास है कि 31 मार्च तक हम ओडिशा को नक्सल समस्या से मुक्त कर देंगे. बचे हुए 15 माओवादी उसी ट्राई-जंक्शन वाले जंगली इलाके में हैं और हमारा सर्च ऑपरेशन तेजी से चल रहा है.”
उन्होंने यह भी बताया कि अगला एक हफ्ता इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बहुत अहम होने वाला है. दूसरी ओर, पड़ोसी राज्यों में स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण है. छत्तीसगढ़ में अभी भी 250 से 300 माओवादी सक्रिय बताए जा रहे हैं, जबकि झारखंड में करीब 50. हालांकि छत्तीसगढ़ में भी आत्मसमर्पण का सिलसिला जारी है. 24 मार्च को एक बड़े कमांडर पापा राव ने 21 साथियों के साथ सरेंडर किया.
पापा राव ने बताया कि सुरक्षा बलों के दबाव, जंगलों में कठिन जीवन और सरकार की पुनर्वास नीति के कारण उन्होंने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है. कुल मिलाकर ओडिशा माओवाद मुक्त होने की राह पर सबसे आगे है और अगले कुछ दिनों में यह लक्ष्य हासिल हो सकता है.