नई दिल्ली: झारखंड के वरिष्ठ भाजपा नेता ब्रजमोहन राम को ओडिशा का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है. 22 साल तक टिकट न मिलने के बावजूद पार्टी के साथ जुड़े रहने वाले इस नेता की नियुक्ति से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनसे बात करना चाहते थे, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि PMO से बार-बार फोन आने के बावजूद उन्होंने फोन ही नहीं उठाया.
फोन क्यों नहीं उठाया?
ब्रजमोहन राम ने एक यूट्यूब चैनल से बात करते हुए बताया, ''फोन प्राइवेट नंबर से आ रहा था. हमने सोचा प्राइवेट नंबर है, कोई पार्टी का होगा... छोड़ो, नहीं उठा रहे थे. लेकिन बार-बार फोन आ रहा था. फिर दूसरे नंबर से कॉल आया. जोशी जी बोले- सर, पीएम साहब आपसे बात करेंगे, हम पीएमओ से बोल रहे हैं.''
इसके बाद प्राइवेट नंबर से फिर कॉल आया और पीएम मोदी से बात हुई. मोदी जी का पहला शब्द था- ''जोहार''. हाल-चाल पूछने के बाद उन्होंने कहा कि आपको सरकार में जिम्मेदारी दी जा रही है, दो-चार दिन में फोन आएगा, लेकिन तब तक इसे गुप्त रखना है. गृह मंत्री अमित शाह ने भी फोन कर बताया कि उनके नाम से राज्यपाल पद का नोटिफिकेशन होने जा रहा है.
22 साल का इंतजार
ब्रजमोहन राम 1996, 1998 और 1999 में पलामू लोकसभा सीट (अनुसूचित जाति आरक्षित) से तीन बार सांसद रह चुके हैं. 2004 के बाद उन्हें टिकट नहीं मिला, लेकिन वे पार्टी के साथ बने रहे. उन्होंने कहा, ''पार्टी ने मुझ जैसे आम कार्यकर्ता को पहचाना है. टिकट न मिलने के बाद भी हम ईमानदारी से काम करते रहे. आजकल लोग टिकट न मिलने पर उसी शाम दूसरी पार्टी में चले जाते हैं, लेकिन मैं तीन बार टिकट न मिलने के बावजूद पार्टी के साथ रहा.''
उन्होंने माता रानी की कृपा और पीएम मोदी व अमित शाह के आशीर्वाद का जिक्र करते हुए कहा कि अब उन्हें यह संवैधानिक पद मिला है. ब्रजमोहन राम की यह नियुक्ति भाजपा में लंबे समय तक वफादारी बनाए रखने वाले नेताओं के लिए प्रेरणा का उदाहरण बन गई है.