पटना: पटना हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि महिला पर चढ़ने (माउंटिंग) के आरोप को बिना मेडिकल या भौतिक सबूतों के बलात्कार नहीं माना जा सकता. अदालत ने आरोपी मोहम्मद ऐनुल हक की बलात्कार की सजा को घटाकर अश्लील हमला (इंडिसेंट असॉल्ट) कर दिया है.
क्या था मामला?
अभियोजन पक्ष का आरोप था कि 8 फरवरी 2010 की रात करीब 10 बजे ऐनुल हक एक विधवा महिला की झोपड़ी में घुस गए, उनका मुंह दबाया और बुरे इरादे से उनके शरीर पर चढ़ गए. जब उन्होंने हाथ हटाया तो महिला ने शोर मचाया, जिससे 10-15 गांव वाले आ गए और आरोपी को पकड़ लिया. बेगूसराय ट्रायल कोर्ट ने 29 जुलाई 2013 को उन्हें बलात्कार का दोषी ठहराते हुए 4 साल की सजा और जुर्माना लगाया था.
हाईकोर्ट का क्या कहा?
जस्टिस संदीप कुमार की सिंगल बेंच ने 8 अक्टूबर को दिए फैसले (जो मंगलवार को सार्वजनिक हुआ) में कहा कि मुकदमे के दौरान महिला को छोड़कर बाकी सभी गवाह पक्षद्रोही हो गए. अभियोजन पक्ष ने कोई मेडिकल सबूत (जैसे चोट या खरोंच) या भौतिक सबूत (जैसे फटे या बिखरे कपड़े) पेश नहीं किए.
अदालत ने माना कि भले ही महिला के बयान को स्वीकार कर लिया जाए, तो भी यह अधिकतम आपराधिक अतिक्रमण और हमला साबित होता है, बलात्कार नहीं. इसलिए सजा को संशोधित कर आरोपी को महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से हमले का दोषी ठहराया गया.
उन्हें 25,000 रुपए का जुर्माना लगाने का आदेश दिया गया, जो तीन हफ्ते के अंदर महिला को भुगतान करना होगा.हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के अमन कुमार बनाम हरियाणा राज्य (2004) और रूपन देओल बजाज बनाम केपीएस गिल (1995) के फैसलों का हवाला दिया.