Delimitation: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने शनिवार को केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन (Delimitation) मुद्दे पर राज्य के सांसदों की बैठक बुलाई, लेकिन प्रमुख दलों डीएमके और एआईएडीएमके ने इसका बहिष्कार कर दिया. नतीजतन, राज्य के कुल 57 सांसदों में से सिर्फ 21 ही बैठक में शामिल हुए.
कलैवाणर अरंगम में हुई इस बैठक में कांग्रेस के 11, सीपीआई, सीपीआई(एम) और वीसीके के दो-दो, तथा एमडीएमके और आईयूएमएल के एक-एक सांसद मौजूद रहे. कांग्रेस के दिग्गज नेता पी. चिदंबरम, वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन और एमडीएमके के दुराई वैको भी शामिल हुए. डीएमके, जिसके 22 लोकसभा और 8 राज्यसभा सांसद हैं, और एआईएडीएमके (4 राज्यसभा सांसद) ने बैठक से दूरी बनाए रखी. उनके सहयोगी पीएमके ने भी भाग नहीं लिया.
डीएमके सांसद कनिमोझी ने कहा कि बैठक का एजेंडा ही स्पष्ट नहीं है. उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के समय इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हो चुकी है और विधानसभा पहले ही प्रस्ताव पारित कर चुकी है. उन्होंने जोर दिया कि डीएमके परिसीमन का विरोध नहीं करता, बल्कि निष्पक्ष परिसीमन चाहता है ताकि तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व कम न हो.
सीनियर डीएमके नेता ए. राजा ने बैठक को तमाशा और हंसी का पात्र करार दिया. एआईएडीएमके ने इसे जल्दबाजी में रचा गया नाटक बताया और पूछा कि जब संसद में कोई नया परिसीमन बिल पेश ही नहीं हुआ तो बैठक की क्या जरूरत. पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार कावेरी-मेकेदातु विवाद जैसे असली मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए यह कदम उठा रही है.
मुख्यमंत्री विजय लंबे समय से केंद्र के परिसीमन प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं. उनका मानना है कि यह दक्षिणी राज्यों, खासकर तमिलनाडु के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कमजोर करने वाला पक्षपाती कदम है. हाल ही में करूर में उन्होंने कहा था कि चाहे कोई भी लाए, तमिलनाडु इसे स्वीकार नहीं करेगा. कोई हमारा स्थान नहीं छीन सकता.
बैठक में शामिल सांसदों ने परिसीमन बिल का विरोध करने और लोकसभा की 543 सीटों तथा तमिलनाडु की 39 सीटों को फ्रीज रखने पर सहमति जताई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र 13 अगस्त के बाद विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन और महिला आरक्षण संशोधन बिल ला सकता है. यह बैठक राज्य की राजनीति में एकता की कमी को उजागर करती है, जहां प्रमुख द्रविड़ दल अलग रुख अपनाए हुए हैं