नई दिल्ली : विदेशी फंडिंग के नियमन को लेकर संसद के मानसून सत्र में सोमवार से बड़ा राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है. प्रस्तावित Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं. गृह मंत्री अमित शाह सदन में सरकार का पक्ष रख सकते हैं. कांग्रेस ने अपने सांसदों को 10, 11 और 12 अगस्त को संसद में अनिवार्य मौजूद रहने के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है.
FCRA यानी Foreign Contribution (Regulation) Act भारत में विदेश से मिलने वाले धन, सामान और विदेशी आतिथ्य के स्वीकार और इस्तेमाल को नियंत्रित करता है. यह कानून गृह मंत्रालय के अधीन है और इसका उद्देश्य विदेशी योगदान के इस्तेमाल में पारदर्शिता तथा राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.
2026 के प्रस्तावित संशोधन को लेकर सरकार का तर्क विदेशी योगदान की निगरानी और नियमों को मजबूत करने से जुड़ा है. वहीं विपक्ष और कुछ संगठन आशंका जता रहे हैं कि सख्त प्रावधानों का असर NGOs, धार्मिक संस्थाओं और सिविल सोसायटी संगठनों पर पड़ सकता है.
बिल को लेकर एक अहम स्पष्टीकरण भी सामने आया है. मिजोरम के मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद कहा गया कि प्रस्तावित कानून का पिछली तारीख से लागू होने का प्रावधान नहीं होगा. इससे उन संस्थाओं की चिंता कुछ कम करने की कोशिश हुई है जो पहले से विदेशी सहायता से परियोजनाएं चला रही हैं.
दिलचस्प बात यह है कि विदेशी स्तर से भी इस कानून पर सवाल उठे, लेकिन भारत सरकार ने साफ कहा कि FCRA से जुड़ा कानून भारत का आंतरिक मामला है और विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करना संप्रभु अधिकार के दायरे में आता है.
अब नजर संसद पर है कि क्या अमित शाह सरकार की मंशा और बिल के प्रावधानों पर विपक्ष के सवालों का जवाब दे पाएंगे, या FCRA एक बार फिर सत्ता और विपक्ष के बीच बड़े राजनीतिक संघर्ष का मुद्दा बनेगा.