नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के उन्नाव रेप मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की आजीवन कारावास की सजा को अपील लंबित रहने तक निलंबित कर दिया है. कोर्ट ने उन्हें कुछ सख्त शर्तों के साथ जमानत दी, जिसमें पीड़िता के दिल्ली स्थित घर से 5 किलोमीटर की दूरी बनाए रखना और पीड़िता या उनकी मां को किसी तरह की धमकी न देना शामिल है.
शर्तों का उल्लंघन होने पर जमानत रद्द हो जाएगी. हालांकि, सेंगर अभी जेल में ही रहेंगे क्योंकि पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के अलग मामले में उन्हें 10 साल की सजा है और उसमें जमानत नहीं मिली. इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एक विवादास्पद टिप्पणी की.
उन्होंने कहा कि कोर्ट ने सेंगर को पीड़िता के घर से 5 किलोमीटर दूर रहने का आदेश दिया है, तो फिर पीड़ित पक्ष असुरक्षित कैसे है? और दिल्ली में प्रदर्शन करने की क्या जरूरत है? उनका इशारा इस ओर था कि जब कोर्ट ने सुरक्षा का इंतजाम कर दिया है, तो विरोध की आवश्यकता नहीं.
दरअसल, पीड़िता और उनका परिवार पिछले कई वर्षों से सुरक्षा कारणों से दिल्ली में रह रहे हैं. उन्नाव में मूल घर होने के बावजूद, वे वहां लौटना सुरक्षित नहीं समझते. हाईकोर्ट के फैसले के तुरंत बाद पीड़िता, उनकी मां और कुछ कार्यकर्ताओं ने दिल्ली के इंडिया गेट पर विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें उन्होंने फैसले को अन्याय बताया और अपनी सुरक्षा पर चिंता जताई. पुलिस ने बाद में उन्हें वहां से हटा दिया. पीड़िता ने कहा कि यह फैसला उनके परिवार के लिए खतरे की घंटी है और वे सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगी.
यह मामला 2017 का है, जब सेंगर पर नाबालिग से बलात्कार का आरोप लगा था. 2019 में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा सुनाई. अब अपील के दौरान सजा निलंबित होने से राजनीतिक विवाद बढ़ गया है.