खुद के मुल्क में 125 साल पुराना मंदिर गिराया, और भारत को सहिष्णुता सिखाने चला पाकिस्तान! दोगलेपन की भी हद होती है।

Rahul Jadaun 07 Sep 2026 11:17 AM 2 Mins
खुद के मुल्क में 125 साल पुराना मंदिर गिराया, और भारत को सहिष्णुता सिखाने चला पाकिस्तान! दोगलेपन की भी हद होती है।

दूसरों को धार्मिक सहिष्णुता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर उपदेश देने वाले पाकिस्तान का दोहरा चरित्र एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने आ गया है। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक पुरानी मस्जिद के ढांचे को हटाए जाने पर आपत्ति जताने वाले पाकिस्तान ने हाल ही में अपने ही देश में सवा सौ साल पुराने एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर को बुलडोजर चलाकर जमींदोज कर दिया।

मदरसे के विस्तार के लिए ढहाया गया मंदिर

पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' और अल्पसंख्यक अधिकार समूह ‘पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी’ के अनुसार, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत स्थित नारोवाल जिले के सिराज गांव में 125 साल पुराने हिंदू मंदिर को 21 अगस्त को गिरा दिया गया। आरोप है कि पास के एक मदरसे के विस्तार के लिए जानबूझकर इस प्राचीन धार्मिक स्थल को तोड़ा गया।

संगठन के चेयरमैन असलम परवेज सहोत्रा ​​ने बताया कि कुछ लोगों ने ढांचे को तोड़कर गुंबद की ईंटें, धातु की फिटिंग और अन्य सामान हटा दिया। इस मामले में 28 अगस्त को स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर पंजाब के अतिरिक्त गृह सचिव को लिखित शिकायत सौंपी गई और दोषी लोगों व लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई।

बारिश का बहाना और सरकार की सफाई

चौतरफा आलोचना के बाद पंजाब प्रांतीय सरकार ने सफाई देते हुए दावा किया कि मंदिर को तोड़ा नहीं गया, बल्कि भारी बारिश के कारण उसका एक हिस्सा ढह गया था, जिसके बाद शेष ढांचा हटाया गया। प्रशासन ने यह भी कहा कि मंदिर से सटी जमीन मदरसे को लीज पर दी गई थी, लेकिन मंदिर की जमीन कभी किसी को नहीं दी गई।

सहारनपुर मामले पर पाकिस्तान का पाखंड

अपने यहां अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों की रक्षा करने में नाकाम पाकिस्तान ने सहारनपुर की घटना को लेकर भारत पर जमकर निशाना साधा। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने इसे 'इस्लामोफोबिक और हिंदुत्व संचालित नीति' करार दिया। साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भारतीय अधिकारियों के खिलाफ संज्ञान लेने की अपील कर दी।

घटती अल्पसंख्यक आबादी और बदतर हालात

पाकिस्तान की यह बयानबाजी इसलिए हास्यास्पद है क्योंकि 1947 में आजादी के वक्त वहां गैर-मुस्लिम आबादी (हिंदू, सिख, ईसाई) लगभग 23 प्रतिशत थी, जो लगातार हो रहे उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के कारण आज घटकर 2 प्रतिशत से भी कम रह गई है। इसके अलावा, पाकिस्तान के संविधान के तहत कोई गैर-मुस्लिम देश का प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति या सेना प्रमुख जैसे शीर्ष पदों पर नहीं बैठ सकता। वहीं, दूसरी ओर भारत एक धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र है जहां सभी नागरिकों को समान संवैधानिक अधिकार प्राप्त हैं।

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